लखनऊ। दिल्ली के जंतर-मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद नोटिस जारी करने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। सरकार ने गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट में तैनात एसीपी /कार्यपालक मजिस्ट्रेट (तृतीय) डॉ. रवि शंकर मिश्रा को निलंबित कर दिया है।मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने भी जांच के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कार्रवाई से सुप्रीम कोर्ट को अवगत करा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी जारी हुआ था नोटिस
जानकारी के मुताबिक, सीजेपी की ओर से पेपर लीक मामले को लेकर 20 से 25 जुलाई के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन में देशभर से बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए थे। सरकार के साथ बातचीत के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया था।इसके बाद प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का मामला सामने आया। इसी क्रम में 4 सितंबर को गौतमबुद्धनगर के एसीपी /कार्यपालक मजिस्ट्रेट-तृतीय डॉ. रवि शंकर मिश्रा ने जीबीयू के छात्र और झांसी निवासी अक्षत त्रिपाठी को शांति भंग समेत विभिन्न धाराओं में कार्रवाई के लिए पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस जारी किया था।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका था कि जंतर-मंतर पर निर्धारित अवधि में प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाए। इसी वजह से नोटिस जारी होने पर सवाल उठे।
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद नोटिस वापस
मामले में विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने 5 सितंबर को 4 सितंबर को जारी नोटिस वापस ले लिया। इसके बाद अब शासन स्तर से भी कार्रवाई की गई है।सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने नोटिस जारी किए जाने को लेकर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
डीजीपी ने दिए जांच के आदेश
डीजीपी राजीव कृष्ण ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि जंतर-मंतर पर 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन में शामिल किसी भी युवा के खिलाफ कार्रवाई न की जाए।अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद छात्र को किस आधार पर नोटिस जारी किया गया और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी थी। जांच पूरी होने के बाद दोषी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एसआई की रिपोर्ट के आधार पर जारी हुआ था नोटिस
बताया गया है कि कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस थाना इको-प्रथम के उप निरीक्षक शिवा पांडेय की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया था।पुलिस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि संबंधित छात्र विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों के साथ धरने में पहुंचा था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान सरकार के विरोध में भ्रामक बातें फैलाकर अन्य छात्रों को उकसाया जा रहा था, जिससे शांति भंग होने की आशंका बनी।
इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर से छात्र को पाबंदी संबंधी नोटिस जारी किया गया था।
पुलिस कमिश्नरेट के पास होते हैं ये अधिकार
उत्तर प्रदेश के जिन शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है, वहां कुछ मामलों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट के अधिकार पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था के तहत अधिकारियों को प्राप्त होते हैं।इनमें गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट, शांति भंग की आशंका में निरोधात्मक कार्रवाई, उपद्रव की आशंका में पाबंद करना तथा कुछ मामलों में संपत्ति संबंधी कार्रवाई जैसे अधिकार शामिल हैं।गौतमबुद्धनगर में भी इसी व्यवस्था के तहत एसीपी /कार्यपालक मजिस्ट्रेट-तृतीय के स्तर से छात्र को पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस जारी किया गया था।हालांकि, इस मामले में मुख्य सवाल यह उठा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी 4 सितंबर को नोटिस कैसे जारी हुआ।
कमिश्नरेट व्यवस्था नहीं होने पर डीएम के पास होते हैं अधिकार
जिन शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू नहीं है, वहां गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट, धरना-प्रदर्शन की अनुमति और शांति भंग की आशंका में निरोधात्मक कार्रवाई जैसे अधिकार मुख्य रूप से जिलाधिकारी के पास होते हैं।डीएम इन अधिकारों को अपर जिला मजिस्ट्रेट और उप जिलाधिकारी को भी हस्तांतरित कर सकते हैं।
कौन हैं डॉ. रवि शंकर मिश्रा?
डॉ. रवि शंकर मिश्रा पीपीएस 2018 बैच के अधिकारी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी भर्ती 31 मई 2021 को हुई थी। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं और उन्होंने पीएचडी की शैक्षणिक योग्यता हासिल की है।वर्तमान में वह पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर में एसीपी /कार्यपालक मजिस्ट्रेट (तृतीय) के पद पर तैनात थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले में अब उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
