Jharkhand: जमशेदपुर में गणेश चतुर्थी की तैयारियां अंतिम दौर पर , बारिश ने मूर्तिकारों की बढ़ाई चिंता

जमशेदपुर: आगामी 14 सितंबर को मनाए जाने वाले गणेश चतुर्थी पर्व को लेकर जमशेदपुर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में गणेश पूजा समितियां पंडाल निर्माण और सजावट को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। वहीं, भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार करने वाले मूर्तिकारों के सामने लगातार हो रही बारिश और बढ़ी हुई नमी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।

बारिश और नमी से प्रतिमाओं को सुखाना मुश्किल

शहर के विभिन्न मूर्ति निर्माण केंद्रों में इन दिनों दिन-रात काम चल रहा है। मूर्तिकारों के अनुसार इस वर्ष सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण मिट्टी की प्रतिमाओं को सूखने में अपेक्षा से ज्यादा समय लग रहा है। इसका सीधा असर प्रतिमाओं की रंगाई, सजावट और उन्हें अंतिम रूप देने के काम पर पड़ रहा है।समय पर ऑर्डर पूरा करने के लिए मूर्तिकारों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। कई मूर्तिकारों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता के कारण काम की रफ्तार प्रभावित हो रही है और हर प्रतिमा को तैयार करने में पहले की तुलना में अधिक समय लग रहा है।

प्लास्टिक शीट और पंखों से प्रतिमाओं को सुखाने की कोशिश

बारिश से बचाव और प्रतिमाओं को जल्द सुखाने के लिए मूर्तिकार प्लास्टिक शीट, टिन शेड, पंखे और अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा ले रहे हैं। कई जगहों पर अस्थायी व्यवस्था बनाकर प्रतिमाओं को सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि बारिश का पानी प्रतिमाओं तक न पहुंच सके।इसके बावजूद लगातार बदलते मौसम ने मूर्तिकारों की परेशानी बढ़ा रखी है। उन्हें बारिश के बीच प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने के साथ-साथ समय पर रंगाई और सजावट का काम भी पूरा करना है।

बढ़ती लागत और सीमित कमाई से परेशान मूर्तिकार

मूर्तिकारों का कहना है कि प्रतिमा निर्माण में लगने वाली मेहनत और समय के मुकाबले आर्थिक लाभ काफी कम है। मिट्टी, रंग, बांस, कपड़ा और अन्य कच्चे माल की कीमतों के साथ-साथ परिवहन खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर, प्रतिमाओं की कीमत में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हो पाती।इस वजह से उनकी आमदनी पर असर पड़ रहा है। मूर्तिकारों के अनुसार हर साल त्योहार के समय काम बढ़ जाता है, लेकिन बढ़ती लागत और अतिरिक्त मेहनत के बावजूद बचत सीमित रह जाती है।

स्थायी जगह नहीं मिलने से भी बढ़ रही परेशानी

मूर्तिकारों ने प्रशासन से स्थायी और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थायी जगह नहीं होने के कारण उन्हें हर साल अस्थायी रूप से दुकान या कार्यस्थल तैयार करना पड़ता है। इससे बारिश के मौसम में प्रतिमाओं को सुरक्षित रखना और काम करना दोनों मुश्किल हो जाता है।

नई पीढ़ी का पारंपरिक कला से घट रहा जुड़ाव

मूर्तिकारों के सामने एक और बड़ी चुनौती इस पारंपरिक कला से नई पीढ़ी का दूर होना है। उनका कहना है कि कठिन मेहनत, मौसम की मार और सीमित आमदनी के कारण युवा इस पेशे में अपना भविष्य नहीं देख रहे हैं।यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाने वाली पारंपरिक कला के संरक्षण को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

13 सितंबर तक प्रतिमाएं तैयार करने का लक्ष्य

फिलहाल जमशेदपुर में गणेश चतुर्थी को लेकर बाजारों में उत्साह का माहौल है। पूजा समितियां पंडाल और सजावट के काम को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। वहीं मूर्तिकारों का पूरा ध्यान प्रतिमाओं को समय पर तैयार करने पर है।मौसम की चुनौती के बावजूद मूर्तिकार 13 सितंबर तक सभी प्रतिमाओं को तैयार कर श्रद्धालुओं और पूजा समितियों तक पहुंचाने की कोशिश में जुटे हैं। अब देखना होगा कि लगातार बारिश के बीच वे अपने लक्ष्य को समय पर पूरा कर पाते हैं या नहीं।

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