Bengal: झारखंड-बंगाल सीमा पर माओवादियों को बड़ा झटका, 15 लाख के इनामी सचिन समेत तीन कुख्यात नेताओं का आत्मसमर्पण

कोलकाता। झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे इलाकों में लंबे समय से सक्रिय तीन कुख्यात माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण से सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये के इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, 10 लाख रुपये की इनामी मीता उर्फ नयनतारा और गौरी उर्फ बुल्लू उर्फ जोबा शामिल हैं।पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, तीनों लंबे समय से कोल्हान, सारंडा और आसपास के जंगलों में सक्रिय रहे हैं। इनके आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
सचिन पर 44, मीता पर 19 और गौरी पर 18 मामले
पुलिस के अनुसार, रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन के खिलाफ हत्या, मुठभेड़, आईईडी विस्फोट और सुरक्षा बलों पर हमले समेत कुल 44 आपराधिक मामले दर्ज हैं।वहीं, मीता उर्फ नयनतारा के खिलाफ 19 मामले और गौरी उर्फ बुल्लू उर्फ जोबा के खिलाफ 18 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।तीनों की लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों को तलाश थी और इनके खिलाफ इनाम भी घोषित किया गया था।
कोल्हान और सारंडा के जंगलों में रहा सक्रिय नेटवर्क
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, तीनों माओवादी नेता लंबे समय तक कोल्हान, सारंडा और आसपास के घने जंगलों में सक्रिय रहे। सुरक्षा बलों के खिलाफ चलाए गए कई अभियानों में इनके प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होने की बात सामने आती रही है।इन इलाकों में माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सुरक्षा बलों की ओर से लगातार अभियान चलाए जाते रहे हैं।
कई आईईडी विस्फोट और मुठभेड़ों में सामने आया सचिन का नाम
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 से 2026 के बीच हुई कई आईईडी विस्फोट, मुठभेड़ और सुरक्षा बलों पर हमले की घटनाओं में सचिन और उसके सहयोगियों का नाम सामने आता रहा है।बताया गया है कि मार्च 2026 में मनोहरपुर-छोटानागरा-जराईकेला सीमा, सितंबर 2024 में तिरिलपोसी जंगल, जनवरी 2023 में तुम्बाहाका जंगल और नवंबर 2025 में सारंडा वन क्षेत्र समेत कई स्थानों पर सुरक्षा बलों और माओवादी दस्तों के बीच घटनाएं हुई थीं।इन अभियानों में सुरक्षा बलों के जवानों के घायल होने और नुकसान की घटनाएं भी सामने आई थीं।
तीनों के आत्मसमर्पण से कमजोर होगा माओवादी नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों के लिए तीन प्रमुख माओवादी नेताओं का आत्मसमर्पण इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे संगठन के सक्रिय कैडरों, ठिकानों, नेटवर्क और गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।पूछताछ के दौरान मिलने वाली जानकारियां आने वाले समय में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने में सुरक्षा एजेंसियों के लिए मददगार साबित हो सकती हैं।
कोल्हान क्षेत्र में माओवादी संगठन को बड़ा झटका
सचिन, मीता और गौरी के आत्मसमर्पण को कोल्हान और आसपास के क्षेत्रों में माओवादी नेटवर्क के कमजोर होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने इन नेताओं के मुख्यधारा में लौटने से संगठन की स्थानीय गतिविधियों और नेटवर्क पर असर पड़ने की संभावना है।हालांकि, माओवादी गतिविधियों की वास्तविक स्थिति और आत्मसमर्पण के बाद सामने आने वाली जानकारियों का आकलन सुरक्षा एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।



