Jharkhand: धनबाद की दो बहनों ने रचा इतिहास, ऑनलाइन गीता पाठ में बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

धनबाद: मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच धनबाद की दो बहनों ने अपनी प्रतिभा, संस्कार और आध्यात्मिक लगाव के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई है। धैय्या निवासी सुनील अग्रवाल और प्रीति अग्रवाल की बेटियां प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज ऐतिहासिक उपलब्धि का हिस्सा बनी हैं।दोनों बहनों की इस सफलता से परिवार के साथ-साथ पूरे धनबाद और कोयलांचल क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
ऑनलाइन गीता चैंटिंग में बनाया विश्व रिकॉर्ड
यह उपलब्धि सेंट्रल चिन्मय मिशन ट्रस्ट (इंडिया) की ओर से आयोजित विशेष ऑनलाइन गीता चैंटिंग कार्यक्रम से जुड़ी है।कार्यक्रम में देश-विदेश से करीब 70 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया था, जबकि लगभग 30 हजार प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन के बाद 8,277 प्रतिभागियों द्वारा एक साथ ऑनलाइन गीता पाठ करने को विश्व रिकॉर्ड के रूप में मान्यता मिली।इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनने पर प्रांजल और आन्या को आधिकारिक प्रमाणपत्र और गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।
प्रांजल ने पांच मिनट में किया गीता के 15वें अध्याय का पाठ
प्रांजल मित्तल ने बताया कि उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का पाठ करीब पांच मिनट में पूरा किया।इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक शुद्ध उच्चारण और सही लय के साथ अभ्यास किया। प्रांजल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और विशेष रूप से अपनी मां को दिया, जिन्होंने बचपन से ही उन्हें गीता के श्लोकों से परिचित कराया।
छोटी उम्र से गीता पाठ सीख रही हैं आन्या
वहीं, आन्या मित्तल ने भी छोटी उम्र से ही गीता पाठ सीखना शुरू कर दिया था। घर में नियमित रूप से श्लोकों का वातावरण रहने के कारण उनकी रुचि संस्कृत उच्चारण और आध्यात्मिक ज्ञान में विकसित हुई।आन्या के लिए यही अभ्यास और रुचि आगे चलकर इस विश्व रिकॉर्ड का हिस्सा बनने की वजह बनी।
मां को कंठस्थ हैं गीता के सभी 18 अध्याय
दोनों बहनों की मां प्रीति अग्रवाल को श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्याय कंठस्थ हैं। उनका मानना है कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है।उन्होंने कहा कि बच्चों के जीवन में परिवार के संस्कार, नियमित अभ्यास और सकारात्मक आध्यात्मिक वातावरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
परिवार के संस्कारों ने बेटियों को दिलाई विश्व मंच पर पहचान
प्रांजल और आन्या की उपलब्धि यह बताती है कि आधुनिक दौर में भी परिवार के संस्कार और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव बच्चों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।धैय्या की इन दोनों बेटियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से विश्व रिकॉर्ड में जगह बनाकर न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि धनबाद और पूरे कोयलांचल क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया है।



