रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी की कक्षा 9 से 12 के माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ सीआईडी में एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है।अदालत ने कहा कि परीक्षा के पहले दौर के पेपर-2 में गड़बड़ी होना स्वीकार किया जा चुका है, लेकिन केवल परीक्षा संचालन करने वाली ठेकेदार एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
2819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा पर उठे सवाल
मामला कई रिट याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के दौरान सामने आया। इन याचिकाओं में 2819 अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल होने के आदेश को चुनौती दी गई थी। जेएसएससी की ओर से कहा गया था कि संदिग्ध गतिविधियों के कारण इन अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा कराई गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान पाया कि आयोग की ओर से कई महत्वपूर्ण तथ्यों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया है।अदालत के अनुसार, कुछ मामलों में तकनीकी आधार भी पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं किए गए।
‘कोई अपने ही मामले का जज नहीं बन सकता’
हाईकोर्ट ने परीक्षा संचालन करने वाली ठेकेदार एजेंसी की भूमिका को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि जिस एजेंसी पर परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी थी, उसी की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने निर्णय लिया।अदालत ने ‘नो मैन कैन बी ए जज इन हिज ओन कॉज” के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में स्वतंत्र विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए थी, ताकि वास्तविक दोषियों और तकनीकी खामियों का निष्पक्ष तरीके से पता लगाया जा सके।
एफआईआर दर्ज नहीं होने पर हाईकोर्ट ने उठाया सवाल
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2023 में प्रावधान होने के बावजूद अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई।कोर्ट ने कहा कि जब आयोग स्वयं अनधिकृत लॉगिन और संदिग्ध गतिविधियों की बात स्वीकार कर रहा है, तो आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि वास्तविक दोषियों को बचाने की कोशिश हो सकती है। इसमें परीक्षा संचालन एजेंसी, परीक्षा केंद्र या संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जरूरी बताई गई।
पूरी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया रद्द नहीं होगी
हाईकोर्ट ने फिलहाल पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक पूरे परीक्षा तंत्र के ध्वस्त होने का पर्याप्त आधार सामने न आए, तब तक पूरी भर्ती प्रक्रिया को रोकना उचित नहीं होगा। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी नियुक्तियां सीआईडी जांच के अंतिम निष्कर्ष के अधीन रहेंगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियुक्तियों पर भी असर पड़ सकता है।
2819 अभ्यर्थियों के अंक दो सप्ताह में जारी करने का आदेश
हाईकोर्ट ने जेएसएससी को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर उन सभी 2819 अभ्यर्थियों के पहले चरण के पेपर-1 और पेपर-2 के अंक जारी करे, जिन्हें पुनर्परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा गया था।अदालत ने कहा कि यदि सीआईडी जांच में कोई अभ्यर्थी निर्दोष पाया जाता है, तो उसके अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए।
डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश
अदालत ने जेएसएससी को परीक्षा से संबंधित सभी डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और सीआईडी जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है।अब सीआईडी जांच के जरिए परीक्षा में हुई कथित तकनीकी गड़बड़ी, अनधिकृत लॉगिन, परीक्षा संचालन एजेंसी की भूमिका और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की पड़ताल की जाएगी।
