Bihar: आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-वर्गीकरण पर जीतन राम मांझी का बड़ा बयान, बोले- लाभ सबसे वंचित तक पहुंचना जरूरी

पटना: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-वर्गीकरण को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े वंचित लोगों को आगे बढ़ाना है। ऐसे में क्रीमी लेयर और आरक्षण के भीतर वर्गीकरण की समीक्षा जरूरी है।

‘आरक्षण का लाभ सबसे निचले पायदान तक पहुंचे’

जीतन राम मांझी ने कहा कि आजादी के 78 वर्षों के बाद भी दलित समुदाय की कई जातियां ऐसी हैं, जिन्हें शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में उनकी आबादी एवं जरूरत के अनुरूप पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।उन्होंने कहा कि आरक्षण का वास्तविक लाभ समाज के उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जो आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे पीछे हैं।

‘आरक्षण खत्म करने की बात नहीं हो रही’

जीतन राम मांझी ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की नहीं है। उनका कहना है कि एक ही वर्ग के भीतर जो लोग लगातार आगे बढ़ चुके हैं, उन्हें उन वंचित लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए जो लंबे समय से आरक्षण के लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ समाज के सबसे जरूरतमंद वर्ग तक पहुंचे।

क्रीमी लेयर का विरोध करने वालों पर मांझी का पलटवार

इस्तीफे की मांग और विरोधी बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मांझी ने कहा कि सामाजिक न्याय और गरीब दलितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है।उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग आर्थिक और सामाजिक रूप से संपन्न हो चुके हैं और क्रीमी लेयर की व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं, वे अति-वंचित और गरीब दलितों के अधिकारों की अनदेखी कर रहे हैं।

‘गरीब दलितों की भी सुध लेने की जरूरत’

मांझी ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था का फायदा लगातार उन्हीं लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए जो पहले से इसका लाभ उठाकर आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने सबसे पिछड़े और वंचित तबके को अवसर देने की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि गरीब और वंचित लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और उनके अधिकारों की आवाज मजबूती से उठाई जानी चाहिए।

आरक्षण में उप-वर्गीकरण को लेकर जारी है बहस

एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-वर्गीकरण का मुद्दा देश में सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है। जीतन राम मांझी के बयान से इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।

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