Jharkhand: गिरिडीह के बढ़नियाटांड़ गांव में बदहाली, बीमार महिला को खाट पर ढोकर पहुंचाया मुख्य सड़क तक

गिरिडीह: जिले के तिसरी प्रखंड की गुमगी पंचायत स्थित आदिवासी बहुल बढ़नियाटांड़ गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। गांव में न तो पक्की सड़क है और न ही नरैना नदी पर पुल। इसका खामियाजा ग्रामीणों को खासकर आपात स्थिति में भुगतना पड़ता है।हाल ही में एक बीमार महिला को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने के दौरान गांव की बदहाल तस्वीर सामने आई। गांव तक एंबुलेंस पहुंचने का रास्ता नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को महिला को खाट पर लिटाकर करीब एक किलोमीटर तक कंधे के सहारे पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।इस घटना की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और विकास के दावों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी, खाट बना मरीज का सहारा

जानकारी के अनुसार, गांव की एक महिला की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने इलाज के लिए उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन गांव तक वाहन और एंबुलेंस के पहुंचने का रास्ता नहीं था।ऐसे में ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाया और बारी-बारी से कंधे पर उठाकर करीब एक किलोमीटर तक पैदल मुख्य सड़क की ओर ले गए। इसके बाद आगे की व्यवस्था कर महिला को इलाज के लिए भेजा गया।बीमार महिला को खाट पर ढोते ग्रामीणों की तस्वीर ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी स्थिति को सामने ला दिया है।

नरैना नदी पर पुल नहीं, बरसात में बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार, बढ़नियाटांड़ गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए नरैना नदी पर पुल निर्माण की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद गांव के लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।नदी और खराब रास्ते के कारण वाहनों का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। किसी मरीज की तबीयत बिगड़ने या अन्य आपात स्थिति में ग्रामीणों को पैदल ही मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल और पक्की सड़क की मांग वे वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने उठाते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

नेता प्रतिपक्ष के गृह प्रखंड में बुनियादी सुविधाओं का सवाल

तिसरी प्रखंड को झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और धनवार विधायक बाबूलाल मरांडी का गृह क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में आदिवासी बहुल बढ़नियाटांड़ गांव में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक जरूरत के समय गांव तक एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती।

लोकसभा क्षेत्र में भी विकास की जमीनी तस्वीर पर सवाल

तिसरी प्रखंड कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण उनका रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है।स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बढ़नियाटांड़ गांव की समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है।

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