Delhi: नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान, स्मृति ईरानी की वापसी; अमित मालवीय संगठन से बाहर

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की बहुप्रतीक्षित नई टीम का ऐलान हो गया है। नई राष्ट्रीय टीम में अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है। संगठन में 12 महिलाओं को जगह मिली है और विभिन्न सामाजिक समुदायों व राज्यों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है।अमेठी लोकसभा चुनाव में हार के बाद राष्ट्रीय राजनीति से दूर चल रहीं स्मृति ईरानी की भाजपा संगठन में महासचिव के रूप में वापसी हुई है। वहीं पार्टी के पूर्व महासचिव माधव को इस बार उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। लंबे समय से भाजपा की सोशल मीडिया सेल संभाल रहे अमित मालवीय नई टीम में जगह नहीं बना सके हैं।

संगठन के बाद मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें तेज

भाजपा संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही केंद्र की मोदी सरकार में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि संगठन में जगह नहीं पाने वाले कुछ युवा सांसदों, जिनमें अनुराग ठाकुर जैसे नाम शामिल हैं, को सरकार में जिम्मेदारी मिल सकती है।इसके अलावा केंद्र सरकार में कुछ अन्य युवा चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि करीब एक पखवाड़े के भीतर मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। इसमें सहयोगी दलों के कुछ नेताओं को भी जगह मिलने की संभावना है।

नई टीम में युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी

नितिन नवीन की नई टीम में 40 वर्ष से कम उम्र के छह, 40 से 49 वर्ष की आयु के 15 और 50 से 59 वर्ष की आयु के 21 सदस्य शामिल हैं। टीम में 40 प्रतिशत से अधिक सदस्य वंचित सामाजिक वर्गों से आने वाले बताए गए हैं।भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, नई टीम को 2029 के लोकसभा चुनाव की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

पीयूष गोयल फिर बने पार्टी के कोषाध्यक्ष

लंबे समय तक भाजपा के कोषाध्यक्ष रहे केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की इसी पद पर फिर वापसी हुई है। उनके साथ राजेश मंगल को सह-कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।वहीं कुछ महीने पहले आम आदमी पार्टी छोड़कर राज्यसभा के सात सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हुए संदीप पाठक को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है।

हरीश द्विवेदी और बिप्लव देव महासचिव बने

पुरानी टीम में सचिव रहे हरीश द्विवेदी को पदोन्नति देते हुए महासचिव बनाया गया है। वह असम के प्रभारी हैं और उनके कार्यकाल में भाजपा ने असम विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है।त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लव देव को भी राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। हरियाणा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में चुनाव सह-प्रभारी के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।इसके अलावा राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, मध्यप्रदेश के गजेंद्र पटेल और हरियाणा के संजय भाटिया को भी महासचिव बनाया गया है।

सुनील बंसल और विनोद तावड़े ने बचाई जगह

मौजूदा महासचिवों में सुनील बंसल और विनोद तावड़े ही अपनी जगह बचाने में सफल रहे हैं। वहीं तरुण चुग को महासचिव पद से हटाकर केंद्रीय भाजपा कार्यालय का प्रभारी बनाया गया है।चुनावी रणनीति के लिए चर्चित सुनील बंसल को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना जाता है। वहीं एबीवीपी से भाजपा संगठन में आए विनोद तावड़े को कुशल संगठनकर्ता के तौर पर जाना जाता है।

अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी

भाजपा की सोशल मीडिया रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमित मालवीय की जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी दी गई है। नितिन नवीन छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहते हुए म्हस्के के काम को देख चुके हैं।दीपक म्हस्के के साथ महाराष्ट्र की प्रीति गांधी, दिल्ली के शिवानंद द्विवेदी, उत्तराखंड के आलोक भट्ट और हरियाणा के अरुण कुमार को सह-संयोजक बनाया गया है।

विभिन्न मोर्चों में भी नए चेहरों को मौका

भाजपा ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मोर्चों की कमान भी नए चेहरों को सौंपी है।

युवा मोर्चा: गुजरात के हेमांग जोशी
महिला मोर्चा: छत्तीसगढ़ की रूप कुमारी चौधरी
ओबीसी मोर्चा: उत्तर प्रदेश के अमरपाल मौर्य
किसान मोर्चा: मध्यप्रदेश के बंसीलाल गुर्जर
एससी मोर्चा: बिहार के शिवेश कुमार राम
एसटी मोर्चा: राजस्थान के मन्नालाल रावत
अल्पसंख्यक मोर्चा: उत्तर प्रदेश के कुंवर बासित अली


सांसद-विधायकों के बजाय संगठन के अनुभवी कार्यकर्ताओं पर भरोसा

नई राष्ट्रीय टीम में कुछ वरिष्ठ नेताओं को छोड़कर बड़ी संख्या में ऐसे कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है, जो वर्तमान में सांसद या विधायक नहीं हैं। हालांकि, इन नेताओं को संगठन में काम करने का लंबा अनुभव रहा है।भाजपा की नई टीम में युवाओं, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर संगठन को चुनावी लिहाज से मजबूत करने की कोशिश की गई है। पार्टी के लिए अब अगले बड़े लक्ष्य के रूप में 2029 का लोकसभा चुनाव देखा जा रहा है।

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