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Rajasthan: राजस्थान हाई कोर्ट ने मॉर्फ्ड फोटो मामले में आरोपी को दी जमानत, 3 साल तक सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक

जोधपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार को नाबालिग लड़की की मॉर्फ्ड तस्वीर सोशल मीडिया पर अपलोड करने के आरोपी को जमानत दे दी। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई कड़ी शर्तें भी लगाईं, जिनमें तीन वर्ष तक फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड, स्नैपचैट सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर प्रतिबंध शामिल है।

सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर रद्द हो सकती है जमानत

जोधपुर बेंच के न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने राजसमंद जिले के भीम थाना में दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार की।अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी ट्रायल कोर्ट के समक्ष शपथपत्र (वचन-पत्र) देगा कि वह अगले तीन वर्षों तक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेगा।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी अपने नाम या किसी फर्जी नाम से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता पाया गया, तो ट्रायल कोर्ट उसकी जमानत रद्द कर सकता है।

पीड़िता और परिवार से संपर्क करने पर भी रोक

अदालत ने आरोपी को पीड़िता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने या किसी प्रकार का संदेश भेजने पर भी रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध मुकदमे के अंतिम निपटारे तक प्रभावी रहेगा।

पीड़िता की मां ने दर्ज कराई थी एफआईआर

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी वर्ष फरवरी में नाबालिग पीड़िता की मां ने एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 18 सितंबर से 16 अक्टूबर 2025 के बीच आरोपी ने पीड़िता की तस्वीर को मॉर्फ कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया था।जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 77, पॉक्सो अधिनियम की धारा 11 एवं 12 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67A के तहत आरोपपत्र दाखिल किया।

बचाव पक्ष ने सुधार का मौका देने की मांग की

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है, जांच पूरी हो चुकी है और अब उससे आगे पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी और पीड़िता पहले एक-दूसरे के परिचित थे तथा आरोपी एक युवा है, जिसे सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। साथ ही आरोपी ने अदालत के समक्ष सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करने का आश्वासन भी दिया।

कोर्ट ने कहा- सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों के लिए सीख जरूरी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी पर पीड़िता को बदनाम करने के उद्देश्य से मॉर्फ्ड तस्वीर तैयार कर सोशल मीडिया पर साझा करने का आरोप है।अदालत ने टिप्पणी की कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग गंभीर विषय है और आरोपी को कम से कम तीन वर्ष तक सोशल मीडिया से दूर रखना उचित होगा, ताकि वह भविष्य में किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल न करे।

50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर मिली जमानत

हाई कोर्ट ने आरोपी को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत प्रदान की। साथ ही आरोपी को ट्रायल कोर्ट में प्रत्येक निर्धारित तिथि पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत तत्काल रद्द की जा सकती है।

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