Jharkhand: एसीसी उद्योग बचाने को लेकर सड़कों पर उतरा जनसैलाब, 16 किमी लंबी पदयात्रा कर समाहरणालय में सौंपा ज्ञापन

चाईबासा : चाईबासा के प्रतिष्ठित एसीसी उद्योग के अस्तित्व को बचाने और स्थानीय रोजगार की रक्षा की मांग को लेकर बुधवार को पूरा क्षेत्र उद्वेलित हो उठा। उद्योग पर मंडराते संकट से आशंकित कर्मचारियों, उनके परिजनों, श्रमिक संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने एक साथ मिलकर एक बेहद विशाल और ऐतिहासिक पदयात्रा निकाली। आंदोलनकारियों ने झुलसाती धूप और मुश्किल रास्तों की परवाह न करते हुए लगभग 16 किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय की और चाईबासा समाहरणालय पहुंचकर जिला प्रशासन को अपनी मांगों का एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा।

हजारों परिवारों की आजीविका दांव पर, आर्थिक संकट की आशंका

पदयात्रा में शामिल प्रदर्शनकारियों और श्रमिक नेताओं का कहना था कि एसीसी सीमेंट प्लांट न केवल चाईबासा बल्कि पूरे पश्चिम सिंहभूम जिले की आर्थिक रीढ़ है। इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों स्थानीय परिवारों की आजीविका (रोजगार) जुड़ी हुई है।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा “यदि किसी भी कारणवश या प्रशासनिक शिथिलता के चलते यह उद्योग प्रभावित होता है या बंद होने के कगार पर पहुंचता है, तो पूरे कोल्हान क्षेत्र की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। हजारों युवा बेरोजगार हो जाएंगे और भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। सरकार और प्रशासन को इसे हर हाल में बचाना होगा।”

हाथों में तख्तियां और गूंजते नारे: 16 किलोमीटर तक दिखा आक्रोश

बुधवार सुबह तय कार्यक्रम के अनुसार प्लांट परिसर और आस-पास के क्षेत्रों से शुरू हुई यह पदयात्रा जैसे-जैसे चाईबासा मुख्य शहर की ओर बढ़ी, इसका आकार और विशाल होता गया। पदयात्रा के दौरान कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य हाथों में बैनर और मांगें लिखी तख्तियां लेकर चल रहे थे, जिनमें ‘रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करो’, ‘एसीसी उद्योग को बचाओ’ और ‘सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे’ जैसे नारे लिखे थे। पूरे 16 किलोमीटर के मार्ग में आंदोलनकारियों ने लगातार नारेबाजी करते हुए अपनी चट्टानी एकजुटता का प्रदर्शन किया। राहत की बात यह रही कि इतना बड़ा हुजूम होने के बावजूद पूरा आंदोलन बेहद अनुशासित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन; मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

समाहरणालय पहुंचने के बाद कर्मचारियों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त की अनुपस्थिति में संबंधित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें अपना ज्ञापन सौंपा।प्रतिनिधिमंडल की मुख्य मांगें है जिसमे की एसीसी उद्योग के निर्बाध और सुचारु संचालन में आ रही तमाम तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं को तुरंत दूर किया जाए।स्थानीय श्रमिकों और कर्मचारियों के हितों व उनकी नौकरी की सुरक्षा के लिए सरकार स्तर पर त्रिपक्षीय वार्ता बुलाई जाए।स्थानीय स्तर पर कच्चे माल या अन्य लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं का जिला प्रशासन त्वरित समाधान निकाले।प्रतिनिधिमंडल ने दोटूक शब्दों में कहा कि यह पदयात्रा तो सिर्फ एक शुरुआत थी। यदि राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने उनके इस अल्टीमेटम पर जल्द ही कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक, उग्र और चरणबद्ध तरीके से पूरे कोल्हान में फैलाया जाएगा।

सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

चूंकि इस वक्त कोल्हान में कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देश पर खुद डीआईजी और वरीय अधिकारी कैंप कर रहे हैं, इसलिए इस 16 किलोमीटर लंबी पदयात्रा को लेकर चाईबासा जिला पुलिस प्रशासन सुबह से ही अलर्ट मोड पर था। पदयात्रा के पूरे रूट में और समाहरणालय परिसर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी, ताकि यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो और सुरक्षा कायम रहे। पदयात्रा में विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि मुख्य रूप से शामिल रहे।

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