Jharkhand: हजारीबाग ट्रेजरी घोटाला के मुख्य आरोपी शंभू सिंह को कड़ी सुरक्षा में रांची ला रही सीआईडी , 15 करोड़ के गबन में खुलेगा सफेदपोशों का राज

हजारीबाग/रांची। हजारीबाग पुलिस विभाग की लेखा शाखा में हुए बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले (कोषागार घोटाला) की जांच कर रही सीआईडी की टीम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को सीआईडी की एक विशेष टीम हजारीबाग पहुंची, जहाँ से मुख्य आरोपी सिपाही शंभू कुमार को कड़ी सुरक्षा के बीच रांची लाया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे रास्ते में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

हाई-प्रोफाइल सुरक्षा घेरे में स्थानांतरण

पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार, आरोपी को हजारीबाग से रांची लाने के लिए डीएसपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में 25 सदस्यीय सशस्त्र टीम तैनात की गई है। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि घोटाले से जुड़े रसूखदार लोग जांच को प्रभावित करने या आरोपी को नुकसान पहुँचाने का प्रयास कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते काफिले में एस्कॉर्ट वाहनों के साथ अतिरिक्त जवानों को शामिल किया गया है और पूरे रूट पर पैनी नजर रखी जा रही है।

क्या है 15 करोड़ का यह घोटाला?

शुरुआती जांच के अनुसार, यह घोटाला सरकारी राजस्व में हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है। पुलिस विभाग की लेखा शाखा में तैनात सिपाही शंभू कुमार ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी वेतन निकासी का जाल बुना और सरकारी खजाने से लगभग 15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उड़ा ली।

घोटाले के मुख्य किरदार (नामजद आरोपी):

शंभू कुमार: मास्टरमाइंड सिपाही, लेखा शाखा में तैनात।

रंजिश सिंह और धीरेंद्र सिंह: लेखा शाखा में तैनात सिपाही।

खुशबू: मुख्य आरोपी शंभू कुमार की पत्नी।

अनु पांडेय: एक अन्य पुलिसकर्मी की पत्नी।

सौरभ कुमार सिंह: घोटाले में शामिल सहयोगी।

रांची में होगी ‘मैराथन’ पूछताछ

सीआईडी की संयुक्त टीम रांची पहुंचने के बाद आरोपी से गायब फाइलों, फर्जी हस्ताक्षरों और बैंक खातों में ट्रांसफर की गई रकम के बारे में कड़ाई से पूछताछ करेगी। जांच का मुख्य केंद्र निम्नलिखित बिंदु होंगे जिसमे घोटाले की राशि का निवेश किन संपत्तियों या व्यवसायों में किया गया?विभाग के कौन से बड़े अधिकारी इस मिलीभगत में शामिल थे?फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे ट्रेजरी से निकासी कैसे संभव हुई?

सफेदपोशों के बेनकाब होने की उम्मीद

जांच अधिकारियों का मानना है कि शंभू कुमार को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने से इस नेटवर्क में शामिल कई बड़े ‘सफेदपोशों’ और अधिकारियों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। पुलिस विभाग के ही कर्मचारियों द्वारा विभाग के बजट में इतनी बड़ी सेंधमारी ने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सीआईडी इस मामले में वित्तीय कड़ियों को जोड़ने के लिए बैंक खातों और अचल संपत्तियों के दस्तावेजों को खंगाल रही है। जल्द ही इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

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