लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को छात्रा से कथित अभद्र बातचीत और अश्लील मांगों के आरोप में कोर्ट ने 20 मई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले की ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में भारी आक्रोश है और प्रशासन ने भी सख्त रुख अपना लिया है।
प्रोफेसर का लैपटॉप और मोबाइल जब्त
पुलिस ने आरोपी प्रोफेसर का लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। साइबर टीम सोशल मीडिया अकाउंट्स और फोन चैट की भी जांच कर रही है। आरोप है कि प्रोफेसर छात्रा को “डार्लिंग” कहकर संबोधित करते थे और पेपर लीक का झांसा देकर बुलाते थे।
विश्वविद्यालय प्रशासन एक्शन मोड में
कुलपति के निर्देश पर गठित आंतरिक जांच समिति ने 24 घंटे के भीतर अपनी जांच पूरी कर ली है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाई है, जिसमें आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।विश्वविद्यालय प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट कार्य परिषद के सामने पेश की जाएगी।
पीड़ित छात्रा ने मांगा समय
मामले में परीक्षा नियंत्रक प्रो. विद्यानंद त्रिपाठी के बयान पुलिस ने दर्ज कर लिए हैं। वहीं पीड़ित छात्रा ने खुद को असहज बताते हुए बयान दर्ज कराने के लिए दो दिन का समय मांगा है।
सोशल मीडिया पर चला ‘सेव एलयू’ अभियान
ऑडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय की छात्राओं ने सोशल मीडिया पर ‘सेव एलयू’ अभियान शुरू कर दिया है। छात्राओं ने आरोपी प्रोफेसर को तत्काल बर्खास्त करने और कैंपस में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।कई छात्राओं ने वीडियो जारी कर कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि भरोसे और सम्मान की जगह है। छात्राओं ने कहा कि जब शिक्षक ही अपने पद का दुरुपयोग करें तो छात्राओं का विश्वास टूटता है।
छात्राओं ने जीरो टॉलरेंस नीति की मांग की
छात्राओं ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए और आरोपी शिक्षक को तत्काल निलंबित किया जाए। सोशल मीडिया पर चल रहे अभियान में बीए, बीएड और बीएएलएलबी समेत कई पाठ्यक्रमों की छात्राएं शामिल हैं।
कोर्ट में पेशी के बाद जेल
बिजनौर निवासी आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर को शुक्रवार रात हिरासत में लिया गया था। लंबी पूछताछ के बाद शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 20 मई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
