
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रदेश में जनगणना-2027 के पहले चरण (मकान सूचीकरण) की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल ‘हेड काउंट’ यानी सिरों की गिनती नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के हर नागरिक तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने का एक वैज्ञानिक आधार है।
पहली बार ‘डिजिटल जनगणना’ और स्वगणना का विकल्प
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह जनगणना देश और प्रदेश के इतिहास में पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी। 7 मई से 21 मई 2026 तक आम नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करने का मौका दिया गया है।यूपी की 25 करोड़ से अधिक की विशाल आबादी को कवर करने के लिए करीब 5.47 लाख कर्मियों को लगाया गया है, जो घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे।
जातीय जनगणना और वन ग्रामों को दी प्राथमिकता
इस बार की जनगणना कई सामाजिक और प्रशासनिक बदलावों को समेटे हुए है। पहली बार जनगणना में जातीय आंकड़ों को भी शामिल किया जा रहा है, जिससे सामाजिक न्याय की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।मुख्यधारा से दूर रहने वाले वन ग्रामों की आबादी को भी इस बार विशेष रूप से शामिल किया गया है।
“डेटा आधारित निर्णय ही सही विकास की कुंजी”
सीएम योगी ने डेटा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक युग में सटीक डेटा ही विकास की आधारशिला है। सही आंकड़ों के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे की योजनाओं को ‘अन्त्योदय’ (अंतिम व्यक्ति के उत्थान) की सोच के साथ तैयार किया जा सकेगा।मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी गणना केवल एक ही स्थान पर कराएं और सटीक व तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करें।
विकास की आधारशिला: क्यों जरूरी है सही जानकारी?
जनगणना के माध्यम से सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्र या स्कूलों की कमी है।किन वर्गों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।भविष्य के लिए कितनी आधारभूत संरचना की आवश्यकता है।



