कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत और तृणमूल कांग्रेस की विदाई के बाद राज्य के कई हिस्सों से हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। स्थिति को बिगड़ता देख चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को हिंसा रोकने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का सख्त निर्देश दिया है।
24 घंटों में रक्तरंजित हुआ बंगाल
नतीजे आने के बाद से अब तक कम से कम चार लोगों की जान जा चुकी है। दोनों प्रमुख दलों ने एक-दूसरे पर खूनी हमले के आरोप लगाए हैं।
भाजपा का दावा: उत्तर परगना के न्यू टाउन में जीत की रैली से लौट रहे कार्यकर्ता मधु मंडल की हत्या कर दी गई। वहीं, हावड़ा के उदयनारायणपुर में यादव बार नामक कार्यकर्ता की हत्या का आरोप लगा है। उनकी पत्नी के अनुसार, ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने और केसरिया रंग से जश्न मनाने के कारण उन पर हमला हुआ।
टीएमसी का दावा: तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कोलकाता के बेलेघाटा और बीरभूम जिले के ननूर में उनके दो कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है।
चुनाव आयोग की सख्त चेतावनी
हिंसा की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के बाद शांति बनाए रखना राज्य प्रशासन की जिम्मेदारी है। आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी को आदेश दिया है कि वे हिंसा वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात करें और उपद्रवियों पर बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के कार्रवाई करें।केंद्रीय बलों को संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने और मतगणना के बाद भड़की आग को शांत करने का जिम्मा सौंपा गया है।
राजनीतिक घमासान: “जश्न मनाना पड़ा भारी”
भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ममता बनर्जी की पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जीत का जश्न मना रहे कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना अलोकतांत्रिक है। दूसरी ओर, टीएमसी ने इन हत्याओं के लिए भाजपा समर्थकों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि जीत के नशे में उनके कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले किए जा रहे हैं।
