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Bengal: पीडीएस घोटाले में ईडी की कार्रवाई, कोलकाता और बर्दवान में कई जगहों पर छापेमारी

कोलकाता/बर्धमान : प्रवर्तन निदेशालय ने शनिवार सुबह पश्चिम बंगाल के राशन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी की टीमों ने कोलकाता, पूर्व बर्धमान और हाबरा में लगभग नौ ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह छापेमारी विशेष रूप से उन आपूर्तिकर्ताओं और निर्यातकों के ठिकानों पर की गई है, जिन पर सरकारी गेहूं की हेराफेरी का आरोप है।

निरंजन चंद्र साहा समेत कई निर्यातक रडार पर

अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान निरंजन चंद्र साहा जैसे प्रमुख निर्यातकों और आपूर्तिकर्ताओं के परिसरों पर केंद्रित है। ईडी को संदेह है कि इन लोगों ने पीडीएस के अनाज को अवैध तरीके से खुले बाजार में बेचने और विदेशों में निर्यात करने के लिए धन शोधन का सहारा लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की जा रही है।

क्या है पूरा घोटाला और ‘मोडस ऑपेरंडी’?

यह मामला अक्टूबर 2020 में बसीरहाट पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी से शुरू हुआ था। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित गेहूं को बिचौलियों और डीलरों की मिलीभगत से कम कीमतों पर खरीदा गया।ईडी का दावा है कि आरोपियों ने सरकारी पहचान छिपाने के लिए भारतीय खाद्य निगम और राज्य सरकार के मार्का वाले बोरों को बदल दिया। सरकारी अनाज को नए बोरों में भरकर उसे ‘वैध भंडार’ के रूप में पेश किया गया और खुले बाजार में या निर्यात के लिए बेच दिया गया।

चुनाव के बीच गरमाई राजनीति

पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच ईडी की यह कार्रवाई काफी अहम मानी जा रही है। राज्य में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान हो चुका है और 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग होनी है। इस मामले में राज्य के पूर्व खाद्य मंत्री ज्योति प्रिय मलिक पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। उनके अलावा कई अन्य प्रभावशाली लोग भी जेल में हैं।
ईडी अब उन डिजिटल साक्ष्यों और बैंक दस्तावेजों की तलाश कर रही है, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि घोटाले की यह रकम किन-किन प्रभावशाली लोगों तक पहुंची है। चुनावी मौसम में इस छापेमारी ने राज्य में एक बार फिर भ्रष्टाचार के मुद्दे को मुख्यधारा में ला दिया है।

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