Delhi: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, कैबिनेट विस्तार और विकास पर हुई चर्चा

नई दिल्ली : बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनके सरकारी आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) पर मुलाकात की। मुख्यमंत्री बनने के बाद दिल्ली के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर सम्राट ने प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन लिया और बिहार की प्रगति को लेकर विजन साझा किया।

प्रधानमंत्री से ‘शिष्टाचार’ मुलाकात और विजन

मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से खुशी जाहिर करते हुए कहा उन्होंने प्रधानमंत्री से ‘विकसित भारत’ की तर्ज पर ‘समृद्ध बिहार’ बनाने के विजन पर चर्चा की। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री का स्नेह बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए निरंतर प्रेरित कर रहा है।

भाजपा मुख्यालय में नितिन नवीन से भेंट

प्रधानमंत्री से मिलने से पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली एयरपोर्ट से सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचे। वहाँ उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार भेंट की। हालांकि दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात संक्षिप्त (लगभग 5 मिनट) रही, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें संगठन और सरकार के बीच समन्वय को लेकर प्रारंभिक चर्चा हुई।

कैबिनेट विस्तार पर सबकी नजरें

सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उनके साथ विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव (जदयू) ने डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ली। लेकिन अभी तक पूर्ण कैबिनेट का गठन नहीं हुआ है। पश्चिम बंगाल सहित 5 राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों के कारण भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व्यस्त है। चर्चा है कि चुनाव खत्म होने के बाद अगले महीने ही कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा। दिल्ली दौरे के दौरान सीएम सम्राट द्वारा संभावित मंत्रियों की सूची पर आलाकमान से विमर्श करने की भी खबरें हैं।

24 अप्रैल को ‘अग्निपरीक्षा’ (विश्वास मत)

मुख्यमंत्री के लिए दिल्ली दौरा जितना अहम है, उतना ही महत्वपूर्ण आगामी 24 अप्रैल की तारीख है। बिहार विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र गुरुवार (24 अप्रैल) को बुलाया गया है।इस दिन सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार सदन में अपना बहुमत साबित करेगी।

व्यस्तता के कारण शपथ में नहीं आए थे पीएम

उल्लेखनीय है कि सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह शामिल नहीं हो पाए थे। बंगाल चुनाव में व्यस्तता के चलते कार्यक्रम को संक्षिप्त रखा गया था। ऐसे में यह मुलाकात रिश्तों में गर्मजोशी और केंद्र-राज्य के बीच मजबूत तालमेल का संदेश देने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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