पटना: बिहार में सिंचाई ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निर्माणाधीन उत्तर कोयल जलाशय योजना अब निर्णायक मोड़ पर है। सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में 1367.61 करोड़ रुपये की इस महात्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति का जायजा लिया गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून से पहले निर्धारित लक्ष्यों को हर हाल में पूरा किया जाए।
कार्य की वर्तमान प्रगति
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने परियोजना के तकनीकी और भौतिक विकास का विवरण साझा किया।
राइट मेन कैनाल : इस मुख्य नहर का 55.04% कार्य संपन्न हो चुका है। विशेष बात यह है कि पिछले महज 13 दिनों में 4.11% की तेज प्रगति दर्ज की गई है।
मशीनरी और मैनपावर: साइट पर वर्तमान में 571 श्रमिक और भारी मशीनरी जैसे एक्सकेवेटर, डम्पर और लाइनिंग पेवर तैनात हैं।
निर्माण कार्य: पैकेज 3 से 11 के बीच अर्थ वर्क, सीएनएस और कैनाल लाइनिंग का काम युद्धस्तर पर जारी है। साथ ही गेट और होइस्ट व्यवस्था का निर्माण भी प्रगति पर है।
भू-अर्जन: औरंगाबाद और गया पर विशेष नजर
परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य अब अपने अंतिम चरण में है।औरंगाबाद में 41.251 हेक्टेयर भूमि में से अधिकांश का अधिग्रहण हो चुका है।मुख्य सचिव ने शेष भू-अर्जन कार्यों को 30 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मुख्य सचिव के कड़े निर्देश
प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को कार्य के प्रति जवाबदेह बनाते हुए निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिए जिसमे निर्माण की गति बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। इसके लिए नियमित साइट निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं।आवश्यकता पड़ने पर मैनपावर और मशीनों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए।लंबित टेंडर और तकनीकी प्रक्रियाओं को जल्द निपटाया जाए ताकि सिंचाई नेटवर्क के विस्तार में कोई रुकावट न आए।
कृषि क्षेत्र के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
उत्तर कोयल जलाशय योजना बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए एक ‘गेमचेंजर’ साबित होगी। इससे औरंगाबाद और गया जैसे जिलों के हजारों हेक्टेयर खेतों तक पानी पहुँचेगा, जिससे न केवल पैदावार बढ़ेगी बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार आएगा। सरकार इस परियोजना की निगरानी सीधे उच्च स्तर से कर रही है ताकि तय समय-सीमा में इसका लाभ जनता को मिल सके।
