Rajasthan: अक्षय तृतीया पर 12 से अधिक बाल विवाह रोके गए, 8 साल के मासूम ने चाइल्डलाइन को फोन कर बचाई अपनी सहेली की जिंदगी

जयपुर/बूंदी : राजस्थान में ‘आखा तीज’ के अबूझ सावे पर होने वाले बाल विवाहों के खिलाफ प्रशासन ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाया। उदयपुर, सीकर, प्रतापगढ़ और बूंदी जिलों में मुस्तैद टीमों ने कार्रवाई करते हुए 12 से अधिक शादियां रुकवाईं। इन कार्यवाइयों में गायत्री सेवा संस्थान और पुलिस प्रशासन की भूमिका अहम रही।
एक मासूम की गुहार: “दीदी, मेरी दोस्त की शादी रुकवा दो”
बूंदी जिले में जागरूकता की एक प्रेरक मिसाल देखने को मिली। यहाँ एक 8 साल के बालक ने अपनी 5वीं कक्षा की सहेली को बाल विवाह के चंगुल से छुड़ाने के लिए चाइल्डलाइन 1098 पर फोन किया। बालक ने भावुक होकर कहा, “भैया/दीदी, मेरी दोस्त की शादी रुकवा दीजिए। वह अभी बहुत छोटी है, हम साथ खेलते हैं। वह पढ़ना चाहती है।”जब टीम मौके पर पहुँची, तो वहाँ न केवल उस 8 साल की बच्ची की, बल्कि एक अन्य 16 साल की किशोरी की भी शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। पुलिस और चाइल्डलाइन ने दोनों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
जिलों में कार्रवाई का विवरण
प्रशासनिक सतर्कता के कारण कई मासूमों को शेल्टर होम भेजा गया ताकि वे सुरक्षित रह सकें।उदयपुर मे सर्वाधिक 9 बाल विवाह विफल किए गए।सीकर और प्रतापगढ़ में 2-2 शादियां रोकी गईं। सुरक्षा की दृष्टि से एक लड़के और एक लड़की को जिला बाल कल्याण समिति के आदेश पर शेल्टर होम भेजा गया है।
ग्राम पंचायतों की बढ़ी जवाबदेही
जिला बाल कल्याण समिति ने स्पष्ट किया है कि अब बाल विवाह रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होगी। कोर्ट के नए नियमों के तहत यदि किसी गांव में बाल विवाह होता है, तो स्थानीय प्रशासन और पंचायत को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
जागरूकता अभियान का असर
बूंदी बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने 8 साल के बच्चे के साहस की सराहना करते हुए कहा कि यह घटना दर्शाती है कि गांवों में बाल विवाह के खिलाफ चलाया जा रहा जागरूकता अभियान अब रंग ला रहा है। गुर्जर, मीणा, मेघवाल, और भील जैसे समुदायों में, जहाँ आखा तीज पर सामूहिक विवाह की परंपरा है, वहाँ अब बच्चे खुद अपने अधिकारों के लिए खड़े हो रहे हैं।



