चाईबासा/पश्चिम सिंहभूम: पश्चिम सिंहभूम जिले के सारंडा के घने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ चल रहा सुरक्षा बलों का अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। शनिवार को सीआरपीएफ के स्पेशल डायरेक्टर जनरल दीपक कुमार ने बालिबा कैंप का दौरा कर स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले 30 दिन नक्सलियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। सुरक्षा बलों ने अब इंतजार की नीति छोड़कर आक्रामक रणनीति अपनाने का फैसला किया है।
बालिबा कैंप में हाई-लेवल रणनीतिक बैठक
शनिवार को हेलिकॉप्टर से बालिबा पहुंचे एसडीजी दीपक कुमार ने सीआरपीएफ की 193 बटालियन कैंप में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे तक गोपनीय रणनीतिक बैठक की। बैठक में मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के साथ-साथ आने वाले दिनों के लिए विशेष ऑपरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया।इस बैठक में सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार सिंह, एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे, पश्चिम सिंहभूम के एसपी अमित रेनू समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मिसिर बेसरा को अल्टीमेटम
करोड़ों रुपये के इनामी नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा को लेकर सुरक्षा बलों ने कड़ा रुख अपनाया है। एसडीजी दीपक कुमार ने कहा कि मिसिर बेसरा के पास अभी भी आत्मसमर्पण का विकल्प खुला है।अगर वह हथियारों के साथ सरेंडर करता है तो सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उसे लाभ मिल सकता है, लेकिन यदि वह आत्मसमर्पण नहीं करता है तो सुरक्षा बल उसे और उसके दस्ते को खोज निकालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
हालिया मुठभेड़ से लिया गया सबक
हाल ही में बालिबा के जंगलों में हुई मुठभेड़ के दौरान नक्सली दस्ता घने जंगलों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा था। इस मुठभेड़ में कुछ जवान घायल भी हुए थे।इस घटना के बाद सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए इलाके में घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन को और अधिक मजबूत कर दिया है।
जवानों में बढ़ा उत्साह
सुरक्षा बलों की हालिया सफलताओं से जवानों में नया जोश देखने को मिल रहा है। एसडीजी दीपक कुमार ने कैंप में जवानों से मुलाकात कर कठिन परिस्थितियों में उनकी कर्तव्यनिष्ठा और साहस की सराहना की।अधिकारियों का मानना है कि नक्सलियों की सप्लाई लाइन और सूचना तंत्र को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में अभियान और तेज होने की संभावना है।
