Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की गिरफ्तारी पर रोक से किया इनकार, कोर्ट ने कहा— ‘असम की अदालत में जाएं’

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने स्पष्ट किया कि खेड़ा को राहत के लिए असम की संबंधित अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हुआ, जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां पर गंभीर आरोप लगाए थे।खेड़ा ने दावा किया था कि रिंकी भुइयां के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। इन आरोपों को गलत बताते हुए रिंकी भुइयां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने खेड़ा पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
अदालती कार्रवाई और ‘अधिकार क्षेत्र’ का विवाद
पवन खेड़ा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया था, लेकिन मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। खेड़ा ने हैदराबाद में याचिका दाखिल कर एक सप्ताह की ट्रांजिट बेल (अग्रिम जमानत) हासिल कर ली थी।सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट का मानना है कि चूंकि मामला असम और दिल्ली से जुड़ा है, इसलिए यह तेलंगाना हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।इसी रोक के बाद खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से 20 अप्रैल तक सुरक्षा की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया।
आधार कार्ड विवाद और कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, जिससे कोर्ट पवन खेड़ा के आचरण से नाराज दिखा।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नोट किया था कि याचिका दाखिल करते समय खेड़ा ने अपने आधार कार्ड के सामने के हिस्से के साथ अपनी पत्नी के आधार कार्ड का पिछला हिस्सा (बैक साइड) लगा दिया था। ऐसा कथित तौर पर इसलिए किया गया ताकि आधार कार्ड पर हैदराबाद का पता दिखे और मामला तेलंगाना हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में लाया जा सके। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह गलती थी जिसे बाद में सुधार लिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘अनुचित आचरण’ करार दिया।



