Bihar: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लिया बड़ा फैसला,बिहार में फिर सजेगा ‘जनता दरबार’

पटना : बिहार की जनता और सरकार के बीच की दूरी को कम करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में बेहद सफल रहे “जनता के दरबार में मुख्यमंत्री” कार्यक्रम को अब नए सिरे से शुरू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य आम लोगों की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा करना और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।

नीतीश कुमार की लोकप्रिय परंपरा की वापसी

नीतीश कुमार के दौर में ‘जनता दरबार’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम आदमी के लिए न्याय का एक सशक्त मंच बन गया था। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि मुख्यमंत्री के साथ सभी विभागों के आला अधिकारी और सचिव मौके पर मौजूद रहते थे, जिससे फाइलों के चक्कर काटने के बजाय समस्याओं का तुरंत समाधान होता था। दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोग सीधे अपनी बात शासन के मुखिया तक पहुँचा पाते थे, जिससे आम जनता का सरकार पर विश्वास बढ़ा था।

सीधा संवाद और प्रशासनिक सुधार

बीच के कुछ समय में प्रशासनिक कारणों से इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अब सम्राट चौधरी इसे दोबारा पटरी पर ला रहे हैं।मुख्यमंत्री का मानना है कि सीधा संवाद ही लोकतंत्र की असली ताकत है। जनता दरबार के जरिए वे सीधे फीडबैक प्राप्त कर सकेंगे कि धरातल पर योजनाएं कितनी प्रभावी हैं।मौके पर अधिकारियों की मौजूदगी से कार्यशैली में सुधार आने की उम्मीद है, क्योंकि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की संभावना बनी रहती है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में सम्राट चौधरी का यह फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। सीधे जनता के बीच पहुँचने से मुख्यमंत्री की छवि एक संवेदनशील और सुलभ नेता के रूप में निखरेगी।लोगों को अब अपनी समस्याओं के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय एक निश्चित तारीख और मंच उपलब्ध होगा।

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