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Uttar Pradesh: कानपुर में 100 करोड़ के ऑनलाइन गेमिंग स्कैम का भंडाफोड़, दुबई से चल रहा था ‘ब्रांच-24’ का खेल

कानपुर : कानपुर की बर्रा पुलिस और साइबर टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित गेमिंग ऐप्स के क्लोन बनाकर ठगी करने वाले गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि यह गिरोह अब तक करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। गिरोह का मुख्य केंद्र दुबई है, जहाँ से ‘ब्रांच-24’ नाम की कंपनी के जरिए इस पूरे काले कारोबार को नियंत्रित किया जा रहा था।

दुबई से जाल और ‘सेट पैटर्न’ पर ठगी

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह लोटस 365, रेड्डी बुक और दुबई ईएक्सएच जैसे प्रतिबंधित ऐप्स की क्लोन वेबसाइट तैयार करता था। ठग टेलीग्राम और इंस्टाग्राम रील्स के जरिए लोगों को गेम खेलने का लालच देते थे। शुरुआत में छोटी रकम जिताई जाती थी, लेकिन जब यूजर मोटी रकम लगाता, तो मास्टर आईडी के जरिए परिणाम बदलकर उसे हरा दिया जाता था। पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपी ओला और उबर जैसी टैक्सियों का इस्तेमाल करते थे। चलती कार से पैसे ट्रांसफर किए जाते थे ताकि लोकेशन लगातार बदलती रहे और साइबर सेल उन्हें ट्रैक न कर पाए।

3 महीने में डेढ़ करोड़ का लेनदेन

पकड़े गए आरोपियों के पास से बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।आरोपियों के पास से 26 मोबाइल, 54 एटीएम कार्ड, 26 पासबुक और एक लैपटॉप बरामद हुआ है। मोबाइल ऐप्स पर मौजूद 50 लाख रुपये को फ्रीज कराया जा रहा है। अनुमान है कि इनके खातों में 1.5 करोड़ से अधिक की राशि है, जो महज पिछले तीन महीनों में ठगी गई है। गिरोह इतना शातिर है कि किसी एजेंट के पकड़े जाने पर दुबई में बैठा आका तुरंत उसका मोबाइल डेटा रिमोटली फॉर्मेट कर देता है ताकि सबूत न मिल सकें।

कानपुर टीम का मुखिया ‘सत्यम’ गिरफ्तार

पुलिस ने इस नेटवर्क की कमान संभाल रहे सत्यम तिवारी (गुजैनी निवासी) सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। सत्यम तिवारी, अनमोल विश्वकर्मा, नितिन गुप्ता, अभिषेक वर्मा, हितेश निगम, स्नेहिल बजाज, सुल्तान अहमद और नौशाद।लखनऊ का रहने वाला मोहित, जो कानपुर टीम का मुख्य हैंडलर है, फिलहाल 14 अन्य साथियों के साथ फरार है।

आईपीएल के दौरान बढ़ जाता है कारोबार

पुलिस आयुक्त के अनुसार, आईपीएल के सीजन में सट्टेबाजी और ठगी का यह कारोबार कई गुना बढ़ जाता है। डार्क वेब और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को लग्जरी लाइफस्टाइल का सपना दिखाकर इस दलदल में धकेला जाता है। इस गेमिंग जाल के कारण कई लोग कर्ज में डूबकर आत्महत्या तक कर चुके हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या टेलीग्राम पर मिलने वाले गेमिंग आईडी के प्रलोभन में न आएं। ये ऐप्स पूरी तरह प्रतिबंधित हैं और इनका नियंत्रण सट्टेबाजों के हाथ में होता है।

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