Bihar: पटना में यूजीसी नियम लागू करने की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने 8 को हिरासत में लिया

पटना: बिहार की राजधानी पटना में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए और गांधी मैदान से लोकभवन तक मार्च निकाला।मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

8 प्रदर्शनकारी हिरासत में

पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 8 छात्रों को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए लोगों में अमर आजाद पासवान, गौतम आनंद, अंबुज पटेल, सुबोध कुमार, प्रेम, दीपक, नीरज रजा और अविनाश कुमार शामिल हैं। सभी को कोतवाली थाना लाया गया है।

कई संगठनों ने लिया भाग

यह मार्च ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले आयोजित किया गया था, जिसमें स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया , भीम सेना और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन सहित कई छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया।

जेपी गोलंबर पर बढ़ा तनाव

प्रदर्शनकारियों का काफिला जब जेपी गोलंबर पहुंचा, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सड़क पर बैरिकेडिंग कर दी। इससे नाराज कुछ छात्र सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करने की कोशिश करने लगे, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोंकझोंक हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर कर दिया।

शहर में लगा लंबा जाम

प्रदर्शन के कारण डाक बंगला चौराहा और आसपास के इलाकों में वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

क्या है प्रदर्शन की मांग

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को लागू किया जाए।इसके साथ ही उन्होंने एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी वर्ग के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के फैसले को भी लागू करने की मांग की।

यूजीसी के नए नियमों पर विवाद क्यों

दरअसल जनवरी 2026 में यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकने के लिए नए नियम लागू किए थे। इन नियमों को लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों में मतभेद पैदा हो गया।कुछ संगठनों ने इन नियमों का समर्थन किया, जबकि दूसरे वर्ग ने इसका विरोध किया। मामला सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया तक पहुंच गया, जहां फिलहाल इन नियमों पर अंतरिम रोक लगी हुई है।

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