पटना: बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 की वोटिंग खत्म होते ही राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। 5 सीटों के लिए हुए इस कड़े मुकाबले में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को तगड़ा झटका लगा है। 243 सदस्यीय विधानसभा में से 239 विधायकों ने ही मतदान किया, जिसमें विपक्ष के 4 विधायकों ने वोटिंग से दूरी बनाकर एनडीए की जीत की राह आसान कर दी है।
महागठबंधन में ‘खेल’: 4 विधायक एनडीए के पाले में?
मतदान के दौरान सबसे चौंकाने वाली खबर तब आई जब महागठबंधन के 4 विधायक विधानसभा नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार, ये विधायक रविवार रात से ही ‘नेटवर्क’ से बाहर थे।कांग्रेस के तीन विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा और मनोज विश्वास वोट डालने नहीं पहुंचे।राजद विधायक फैसल अली ने भी ऐन वक्त पर तेजस्वी यादव को धोखा देते हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया।इस अनुपस्थिति के कारण राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह का वोट बैंक 41 से गिरकर 37 पर आ गया है, जिससे उनकी हार लगभग तय मानी जा रही है।
एनडीए की ‘क्लीन स्वीप’ की तैयारी
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए एनडीए ने पूरी ताकत झोंक दी थी। एनडीए के सभी 202 विधायकों ने एकजुट होकर मतदान किया।
कौन हैं संभावित विजेता?
नीतीश कुमार (JDU)
रामनाथ ठाकुर (JDU)
नितिन नवीन (BJP)
शिवेश कुमार (BJP)
उपेंद्र कुशवाहा (RLM) – अमरेंद्र धारी सिंह के खिलाफ सीधी टक्कर में मजबूत।
कैसे होगा जीत का फैसला?
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 41 वोटों का कोटा निर्धारित था, लेकिन 4 विधायकों के वोट न देने के कारण यह कोटा थोड़ा नीचे आएगा।एनडीए के चार उम्मीदवार सीधे तौर पर जीत रहे हैं।एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश कुमार के पास 38 वोट पहली वरीयता के हैं। एनडीए के अन्य 164 विधायकों ने उन्हें दूसरी वरीयता का वोट दिया है। यदि पहली वरीयता में कोटा पूरा नहीं होता है, तो दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती उन्हें जीत दिला देगी।
तेजस्वी की रणनीति फेल!
भले ही तेजस्वी यादव ने ओवैसी की पार्टी के 5 और मायावती की पार्टी के 1 विधायक का समर्थन हासिल कर लिया था, लेकिन वे अपने घर के विधायकों को एकजुट नहीं रख पाए। विपक्ष के कुल 41 विधायकों में से केवल 37 ने ही वोट किया, जिससे महागठबंधन की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
