Delhi: दिल्ली के नए उपराज्यपाल बने तरनजीत सिंह संधू, वी.के. सक्सेना को मिला लद्दाख का प्रभार

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली को नया उपराज्यपाल मिल गया है। पूर्व अनुभवी राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को गुरुवार को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने वी.के. सक्सेना का स्थान लिया है। केंद्र सरकार ने इसी के साथ वी.के. सक्सेना को लद्दाख का नया उपराज्यपाल नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

पीएम मोदी और अमित शाह का जताया आभार

दिल्ली के एलजी के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत करने से पहले तरनजीत सिंह संधू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी का हृदयपूर्वक आभार, जिन्होंने मुझे दिल्लीवासियों की सेवा का यह अवसर दिया। मैं समर्पण, निष्ठा और विनम्रता के साथ दिल्ली की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हूं।

कौन हैं तरनजीत सिंह संधू?
तरनजीत सिंह संधू भारतीय कूटनीति का एक बहुत बड़ा और अनुभवी चेहरा रहे हैं। उनके करियर के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

राजनयिक अनुभव: संधू भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 1988 बैच के अधिकारी हैं।

अमेरिका में राजदूत: वे फरवरी 2020 से जनवरी 2024 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे, जहां उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचाया।

राजनीतिक सफर: सेवा से निवृत्त होने के बाद उन्होंने 2024 में भाजपा के टिकट पर अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ा था।

विशेषज्ञता: उन्हें अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मामलों का गहरा जानकार माना जाता है।

वी.के. सक्सेना का लद्दाख तबादला

वी.के. सक्सेना लगभग चार वर्षों तक दिल्ली के उपराज्यपाल रहे। उनके कार्यकाल के दौरान दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के साथ शासन और प्रशासनिक मुद्दों पर कई बार तीखी बहस और टकराव देखने को मिला। अब उन्हें केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

दिल्ली के लिए क्या बदलेंगे समीकरण?

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि एक अनुभवी राजनयिक होने के नाते तरनजीत सिंह संधू का दृष्टिकोण दिल्ली के प्रशासनिक कार्यों और केंद्र-राज्य समन्वय में नया संतुलन ला सकता है। उनकी नियुक्ति को दिल्ली के आगामी रणनीतिक विकास और शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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