भोपाल: मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपने दो साल पूरे करने के अवसर पर बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर बढ़ रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए की शानदार जीत के बाद राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें जोर पकड़ चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों से उनके विभागों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें परफॉर्मेंस का मूल्यांकन प्रमुख आधार होगा। राजनीतिक गलियारों में नए-पुराने चेहरों के मिश्रण और बड़े फेरबदल की चर्चा है।
बिहार चुनाव की जीत ने दी हवा, मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज
मध्य प्रदेश सरकार के दो साल पूरे होने का जश्न मनाने के साथ ही राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए की अप्रत्याशित सफलता ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके चलते दिल्ली में उनकी तारीफें हो रही हैं। पार्टी आलाकमान इस योगदान का इनाम देते हुए उन्हें मंत्रिमंडल गठन में पूरी छूट दे सकता है। सूत्र बताते हैं कि यह विस्तार आने वाले हफ्तों में ही हो सकता है, जो राज्य की राजनीति को नया रंग देगा।
विभागवार रिपोर्ट से खुलेगी नई पारी, परफॉर्मेंस बनेगी कसौटी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को उनके विभागों के कामकाज की विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। यह कदम सरकार के दो साल के कार्यकाल की समीक्षा का हिस्सा है, लेकिन इसका असर मंत्रिमंडल पर भी पड़ेगा। परफॉर्मेंस के आधार पर ही अब किसी को मंत्री पद पर बरकरार रखा जाएगा या बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। भाजपा के सीनियर नेताओं का मानना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता लाएगी और कुशल नेतृत्व को बढ़ावा देगी।
संभावित फेरबदल: कुछ मंत्रियों की छुट्टी, सीनियरों को मिलेगा मौका
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को उनके प्रदर्शन के अभाव में अलविदा कहा जा सकता है। वहीं, कई वरिष्ठ विधायकों को कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को केंद्रीय संगठन में जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। यह बदलाव न केवल राज्य सरकार को मजबूत करेगा, बल्कि पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने में भी मददगार साबित होगा।
चर्चित नाम: गोपाल भार्गव से ललिता यादव तक, दिग्गजों की वापसी संभव
मंत्रिमंडल विस्तार के संभावित चेहरों की सूची में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, मालिनी गौड़, अर्चना चिटनिस, अजय विष्णोई, हरिशंकर खटीक और ललिता यादव जैसे दिग्गजों के नाम प्रमुखता से उभर रहे हैं। इनमें से कई पहले भी मंत्री रह चुके हैं और उनके समर्थक लंबे समय से उनकी वापसी की मांग कर रहे थे। नए चेहरों को भी शामिल करने की योजना है, ताकि मंत्रिमंडल में विविधता और ताजगी बनी रहे। यह मिश्रण पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो आगामी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।
भाजपा का स्पष्ट रुख: ‘समीक्षा सामान्य प्रक्रिया, विस्तार सीएम का विशेषाधिकार’
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमारी पार्टी हर स्तर पर काम की समीक्षा करती रहती है। मुख्यमंत्री जी खुद हर महीने अधिकारियों और योजनाओं की समीक्षा करते हैं। दो साल पूरे होने पर विभागवार रिपोर्ट मांगी गई है, यह सामान्य प्रक्रिया है। मंत्रिमंडल विस्तार होगा या नहीं, यह मुख्यमंत्री जी का विशेष अधिकार है।” प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि सभी फैसले पार्टी हित और जनकल्याण को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
कांग्रेस का तीखा तंज: ‘मोहन यादव को मिलेगी खुली छूट, बड़े कद के नेताओं को बाहर का रास्ता?’
विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा, “बिहार में बंपर जीत का बड़ा श्रेय मोहन यादव को जा रहा है। अब दिल्ली वाले उन्हें पुरस्कार में खुली छूट दे सकते हैं। अगर विस्तार हुआ तो मोहन यादव अपने से बड़े कद वाले नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं। कुछ को तो संगठन में भी भेजने की तैयारी है।” वर्मा ने चेतावनी दी कि यह फेरबदल पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा सकता है।
नजरें दिल्ली और भोपाल पर: अगला संकेत तय करेगा भविष्य
राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा, जिसमें परफॉर्मेंस आधारित चयन और नए-पुराने चेहरों का संतुलित मिश्रण मुख्य विशेषता होगी। अभी सभी की निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और दिल्ली के बड़े नेताओं के अगले संकेतों पर टिकी हैं। यह बदलाव न केवल राज्य सरकार की दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति को भी मजबूती प्रदान करेगा। विकास की इस नई यात्रा में मध्य प्रदेश के लोग उम्मीदों भरी नजरों से देख रहे हैं।
