पटना/दरभंगा: बिहार सरकार उत्तर बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल शिक्षा की सूरत बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को अब अत्याधुनिक और हाईटेक सुविधाओं से लैस कर विश्वस्तरीय अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य उत्तर बिहार के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों पर निर्भरता खत्म करना है।
2500 बेड की क्षमता और 250 नई मेडिकल सीटें
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डीएमसीएच के विस्तार के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। वर्तमान क्षमता में 1700 अतिरिक्त बेड जोड़े जा रहे हैं, जिससे अस्पताल की कुल क्षमता 2500 बेड तक पहुंच जाएगी।बुनियादी ढांचे के विकास के साथ ही मेडिकल की पढ़ाई के लिए 250 नए नामांकन की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे राज्य को अधिक डॉक्टर मिल सकेंगे।
अत्याधुनिक सर्जिकल वार्ड तैयार, 3 साल का लक्ष्य
सरकार ने इस पूरी परियोजना को अगले तीन वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। 400 बेड वाला आधुनिक सर्जिकल वार्ड बनकर तैयार हो चुका है और जल्द ही इसे मरीजों के लिए खोल दिया जाएगा। पूरे परिसर को हाईटेक मेडिकल उपकरणों, आधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटर और डिजिटल हेल्थ सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
पीएमसीएच पटना की तर्ज पर होगा विकास
दरभंगा का यह विकास राजधानी पटना के पीएमसीएच मॉडल पर आधारित है। बता दें कि पटना पीएमसीएच में पहले ही 1117 बेड वाले 2 टावर भवनों का सफल संचालन शुरू हो चुका है, जहां आंख, कान, गला और गैस्ट्रो जैसी बीमारियों के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मिल रही हैं। अब ठीक वैसी ही सुविधाएं उत्तर बिहार के केंद्र दरभंगा में उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उत्तर बिहार के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी परियोजना
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल दरभंगा, बल्कि मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। बिहार सरकार का दावा है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद स्वास्थ्य और शिक्षा के मानकों में बिहार देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा होगा।
