
उज्जैन : मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने शुक्रवार को उज्जैन के लक्ष्मीपुरा गांव में अपना पहला सार्वजनिक प्रवचन दिया। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उन्हें सुनने पहुंचे।करीब डेढ़ घंटे तक चले इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में उन्होंने देवी शक्ति, माता सती और 52 शक्तिपीठों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
अब ‘स्वामी हर्षानंद गिरी’ के नाम से जानी जाएंगी
19 अप्रैल को उज्जैन स्थित पंचायती निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज के मार्गदर्शन में हर्षा रिछारिया ने संन्यास ग्रहण किया था।संन्यास के बाद उन्होंने ‘स्वामी हर्षानंद गिरी’ नाम धारण किया और गृहस्थ जीवन त्याग दिया। उनके संन्यास को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा भी रही।
राजा दक्ष और माता सती की कथा से की शुरुआत
लक्ष्मीपुरा गांव में आयोजित कार्यक्रम में हर्षानंद गिरी ने अपने प्रवचन की शुरुआत राजा दक्ष और माता सती की कथा से की।उन्होंने कहा कि बिना निमंत्रण कहीं नहीं जाना चाहिए और इस कथा के माध्यम से जीवन के व्यवहारिक और आध्यात्मिक संदेशों को समझाया।
“शक्ति के बिना शिव भी शून्य हैं”
प्रवचन के दौरान हर्षानंद गिरी ने शिव महापुराण और भागवत पुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि शक्ति और शिव एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।उन्होंने कहा, “जैसे माता-पिता दोनों का समान महत्व है, वैसे ही शिव और शक्ति को अलग नहीं किया जा सकता। शक्ति के बिना शिव भी शून्य हैं।”
52 शक्तिपीठों और बीज मंत्रों का बताया महत्व
हर्षानंद गिरी ने श्रद्धालुओं को बताया कि हिंदी वर्णमाला के 52 अक्षर शक्तिपीठों के बीज मंत्रों से जुड़े हुए हैं।उन्होंने कहा कि शक्तिपीठों से ही बीज मंत्रों की उत्पत्ति हुई और वहीं से वर्णमाला का विकास माना जाता है।
“सच्चे मन से पुकारने पर मां स्वयं रक्षा करती हैं”
उन्होंने माता भगवती का स्मरण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।उन्होंने कहा, “मां भगवती अपने भक्तों की रक्षा के लिए स्वयं आती हैं।”
मंच पर आने से पहले थीं घबराई
प्रवचन के दौरान हर्षानंद गिरी बीच-बीच में लिखित नोट्स देखती भी नजर आईं।उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि मंच पर आने से पहले वह काफी नर्वस थीं। उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने बोलना और हजारों लोगों के सामने प्रवचन देना अलग अनुभव है।हालांकि उन्होंने गुरु और माता रानी के आशीर्वाद से सफलतापूर्वक अपना पहला आध्यात्मिक कार्यक्रम पूरा किया।
देवी को बताया चेतना और जागृति का स्वरूप
हर्षानंद गिरी ने कहा कि देवी चेतना और जागृति का स्वरूप हैं, जिनका न आदि है और न अंत।उन्होंने कहा कि बिना गुरु और माता रानी की कृपा के कथा संभव नहीं है और देवी कथा सुनना भी विशेष कृपा का परिणाम होता है।
गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
कार्यक्रम में लक्ष्मीपुरा, कायथा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन स्थल पर हर्षानंद गिरी के स्वागत में जगह-जगह होर्डिंग्स भी लगाए गए थे।



