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Rajasthan: ऑपरेशन सिंदूर के पहली सालगिरह पर बोले पूर्व डीजीएमओ- आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में आया बड़ा बदलाव

जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली सालगिरह पर पूर्व डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इसे भारत की रणनीतिक यात्रा का निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव साबित हुआ।उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड और 9 बड़े आतंकवादी कैंपों को निशाना बनाया गया, जिससे भारी नुकसान हुआ। साथ ही भारत ने अपने किसी भी सैन्य एसेट को क्षति नहीं होने दी। उन्होंने दावा किया कि हालात से घबराकर पाकिस्तान ने खुद कार्रवाई रोकने की अपील की थी।

9 प्रिसिजन स्ट्राइक से दहला आतंकियों का नेटवर्क

पूर्व डीजीएमओ ने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत कुल 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की गई थीं। इनमें 7 भारतीय सेना और 2 भारतीय वायुसेना द्वारा अंजाम दी गईं।उन्होंने कहा कि ऑपरेशन की सफलता में स्वदेशी रक्षा तकनीक की बड़ी भूमिका रही। ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और आधुनिक निगरानी प्रणालियों का प्रभावी इस्तेमाल किया गया।राजीव घई ने कहा, “ऑपरेशन ने साबित कर दिया कि आत्मनिर्भर भारत केवल नारा नहीं, बल्कि देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने वाला वास्तविक हथियार है।”

थल, जल और वायु सेना ने मिलकर चलाया संयुक्त अभियान

उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान जमीन, हवा और समुद्र—तीनों क्षेत्रों की क्षमताओं का संयुक्त उपयोग किया गया। खुफिया एजेंसियां, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट, सीमा सुरक्षा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह समन्वय में काम कर रही थीं।पूर्व डीजीएमओ के अनुसार पाकिस्तान इस कार्रवाई से इतना दबाव में आ गया था कि उसने भारत से अभियान रोकने का अनुरोध किया।

100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में सक्रिय आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया गया था।इस सैन्य कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन, मिसाइल और तोपों से हमला किया, लेकिन भारतीय सेना ने करारा जवाब देते हुए कई रडार और सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दिया।

10 मई को पाकिस्तान ने संघर्ष विराम की पहल की

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि 10 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत से संपर्क कर संघर्ष समाप्त करने पर सहमति जताई थी।उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब वैश्विक स्तर पर सैन्य और रणनीतिक योजना के “गोल्ड स्टैंडर्ड” के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि यह अभियान अंत नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई रणनीतिक शुरुआत थी।

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