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Bihar: 7 मई को गांधी मैदान में होगा मंत्रिमंडल विस्तार, राज्यपाल दिलाएंगे नए मंत्रियों को शपथ

पटना : बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब मंत्रिमंडल को पूर्ण स्वरूप देने की तैयारी अंतिम चरण में है। आगामी 7 मई को राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए चेहरे इस दिन पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।

गांधी मैदान में ‘भव्य’ आयोजन की तैयारी

आमतौर पर मंत्रिमंडल विस्तार राजभवन के भीतर होता है, लेकिन इस बार इसे जनता के बीच ले जाने की योजना है। राज्यपाल सय्यद अता हसनैन नए मंत्रियों को शपथ दिलाएंगे।पटना जिला प्रशासन ने गांधी मैदान में बड़े टेंट और मंच निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। आलाधिकारियों की बैठक में सुरक्षा और बैठने की व्यवस्था की रणनीति तैयार की गई है। इस समारोह में दिल्ली से भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ एनडीए के सभी घटक दलों के प्रमुखों के शामिल होने की संभावना है।

दिल्ली से लौटने के बाद नीतीश कुमार से मिले सीएम

रविवार को दिल्ली में अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर पटना लौटे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को जदयू प्रमुख नीतीश कुमार के आवास पर उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नामों और विभागों के बंटवारे पर विस्तृत चर्चा हुई। सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के साथ तस्वीरें साझा करते हुए हालिया विधानसभा चुनावों में एनडीए की ‘शानदार जीत’ की खुशियां भी साझा कीं।

किसे मिलेगा मंत्रिमंडल में स्थान?

बिहार विधानसभा की सदस्य संख्या (243) के अनुसार, मंत्रिमंडल में अधिकतम 30 मंत्री हो सकते हैं। इस विस्तार में एनडीए के सभी सहयोगियों को साधने की कोशिश की जाएगी।भाजपा और जदयू के अलावा चिराग पासवान , जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा (रालोमो) की पार्टियों को भी प्रतिनिधित्व मिलना तय माना जा रहा है।फिलहाल मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री के अलावा केवल दो उपमुख्यमंत्री (विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव) ही शामिल हैं।

भाजपा नेताओं में उत्साह

पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने हालांकि इसे मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार बताया, लेकिन पार्टी के भीतर इस ‘भव्य आयोजन’ को लेकर जबरदस्त उत्साह है। भाजपा नेताओं का दावा है कि यह समारोह राजभवन में हुए सादे शपथ ग्रहण से कहीं अधिक बड़ा और प्रभावशाली होगा, जो 2026 के राजनीतिक समीकरणों को एक नई दिशा देगा।

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