Bengal: 4 मई को मतगणना के लिए चुनाव आयोग की ‘चाक-चौबंद’ तैयारी, 242 नए ऑब्जर्वर तैनात

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सत्ता की जंग अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। 4 मई को होने वाली मतगणना को पारदर्शी, शांतिपूर्ण और भयमुक्त बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष रणनीति तैयार की है। इसके तहत राज्य भर में 242 अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है।
पर्यवेक्षकों की भारी तैनाती (संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत)
आयोग ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिकारियों को सीधे अपने नियंत्रण में लिया है। 165 मतगणना पर्यवेक्षक उन विधानसभा क्षेत्रों में तैनात रहेंगे जहाँ एक से अधिक काउंटिंग हॉल बनाए गए हैं।77 पुलिस पर्यवेक्षक का मुख्य कार्य मतगणना केंद्रों के बाहर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा घेरे की निगरानी करना होगा।पुलिस पर्यवेक्षक सुरक्षा की कमान तो संभालेंगे, लेकिन वे किसी भी स्थिति में मतगणना हॉल के भीतर प्रवेश नहीं करेंगे।
क्यूआर कोड आधारित प्रवेश और डिजिटल सुरक्षा
मतगणना केंद्रों की सुरक्षा को ‘हाई-टेक’ बनाया गया है ताकि कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति प्रवेश न कर सके। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा ECINet पोर्टल के माध्यम से पहचान पत्र जारी किए जा रहे हैं।मतगणना केंद्रों में प्रवेश केवल क्यूआर कोड आधारित फोटो आईडी के जरिए ही संभव होगा।मतगणना हॉल के भीतर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति केवल मतगणना पर्यवेक्षक और रिटर्निंग अधिकारी को होगी; अन्य सभी के लिए यह पूरी तरह प्रतिबंधित है।
पारदर्शिता के लिए ‘क्रॉस-वेरिफिकेशन’ सिस्टम
मतों की गिनती में किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो, इसके लिए त्रि-स्तरीय जांच व्यवस्था लागू की गई है।
प्रपत्र 17C-II: कंट्रोल यूनिट से परिणाम नोट करने के बाद इसे मतगणना एजेंटों के साथ साझा किया जाएगा और उनके हस्ताक्षर लिए जाएंगे।
माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका: प्रत्येक टेबल पर तैनात माइक्रो-ऑब्जर्वर स्वतंत्र रूप से परिणाम नोट करेंगे।
राउंड-वार मिलान: हर राउंड की गिनती खत्म होने पर माइक्रो-ऑब्जर्वर और सुपरवाइजर के डेटा का मिलान मतगणना पर्यवेक्षक द्वारा किया जाएगा।
दो सीटों पर पुनर्मतदान
मतगणना से पहले, 29 अप्रैल को हुई वोटिंग के दौरान मिली शिकायतों के आधार पर दो सीटों के 15 बूथों पर पुनर्मतदान कराया जा रहा है। आयोग का लक्ष्य है कि 4 मई को जब बक्से खुलें, तो प्रक्रिया पर किसी भी दल को सवाल उठाने का मौका न मिले।



