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Jharkhand: गोड्डा में अडानी पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित 1363 एकड़ भूमि पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई, याचिका स्वीकार

रांची:झारखंड के गोड्डा जिले में स्थापित अडानी थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित कृषि भूमि को लेकर अब मामला अदालत तक पहुंच गया है। झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।याचिका में कहा गया है कि गोड्डा में अडानी पावर लिमिटेड द्वारा स्थापित अडानी थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए लगभग 1363 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया, जो कि पूरी तरह से विवादों में है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस भूमि अधिग्रहण का कोई वास्तविक सार्वजनिक उद्देश्य नहीं है, क्योंकि इस परियोजना से उत्पादित होने वाली अधिकांश बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जानी है।याचिका में यह भी दलील दी गई है कि परियोजना से स्थानीय लोगों या राज्य को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है, बल्कि इससे केवल कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा मिल रहा है।

80% भूमि मालिकों की सहमति नहीं लेने का आरोप

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में भूमि मालिकों की अनिवार्य 80 प्रतिशत सहमति प्राप्त नहीं की गई, जबकि कानून के तहत यह आवश्यक है। इसके कारण करीब 4000 से अधिक किसान और खेतिहर मजदूर प्रभावित हुए हैं।

संथाल परगना टेनेंसी कानून के उल्लंघन का आरोप

याचिका में यह भी कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में संथाल परगना किरायेदारी अधिनियम, 1949 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। इस कानून के तहत संथाल परगना क्षेत्र में भूमि के हस्तांतरण और अधिग्रहण को लेकर सख्त नियम लागू हैं, ताकि स्थानीय आदिवासी और मूलवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

भूमि लेने के लिए दबाव और लाठीचार्ज का आरोप

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि भूमि प्राप्त करने के लिए ग्रामीणों पर दबाव बनाया गया। कई स्थानों पर विरोध करने वाले किसानों और ग्रामीणों पर लाठीचार्ज की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।

अब हाई कोर्ट करेगा मामले की सुनवाई

मामले में अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए आगे की सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इस प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद शादाब अदालत में पक्ष रख रहे हैं।अब इस मामले में अदालत की आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका प्रभाव न केवल गोड्डा जिले बल्कि राज्य में चल रही अन्य औद्योगिक परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है।

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