
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें ‘अपरिपक्व’ और ‘वंशवादी’ करार दिया है। डिप्टी सीएम ने अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि जिन्हें सत्ता विरासत में मिली हो, वे जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं के संघर्ष को कभी नहीं समझ सकते।
“बिना संघर्ष के सत्ताधीश बनने वाले क्या जानें मेहनत”
डिप्टी सीएम ने अखिलेश यादव की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाते हुए लिखा। बिना किसी जमीनी संघर्ष के राज परंपरा की तरह सत्ता पाने वाले लोग नहीं जानते कि एक साधारण परिवार से निकलकर सामाजिक जीवन में पहचान बनाना कितना कठिन है। जिस अनुशासन और संघर्ष को आप “दरी बिछाना” कहकर मजाक उड़ा रहे हैं, वह आपकी संकुचित राजनीतिक सोच को दर्शाता है।
सनातन और दीपावली पर घेरा
ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे हिंदुओं से बहुत दूर जा चुके हैं। “आप दीपावली मनाने का विरोध करते हैं और ईद पर मिठाइयां बांटते फिर रहे हैं।”पाठक ने याद दिलाया कि रामचरितमानस को जलाने और अपमानित करने वाले नेता समाजवादी पार्टी के ही थे, इसलिए उन्हें सनातन पर ज्ञान देने की जरूरत नहीं है।
डिप्टी सीएम ने दी PDA की नई परिभाषा
अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के जवाब में ब्रजेश पाठक ने तीखे सवाल पूछे
P (पिछड़ा): क्या पिछड़े वर्ग के सम्मान की परिभाषा में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बाबू कल्याण सिंह की अंत्येष्टि में न जाना शामिल था?
D (दलित): जब आजम खान ने बाबा साहब आंबेडकर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी, तब अखिलेश यादव क्यों मौन थे? क्या उनमें आजम खान को पार्टी से बाहर निकालने का साहस है?
A (अल्पसंख्यक): सपा के अल्पसंख्यक के दायरे में जैन, सिख और पारसी नहीं आते, उनके लिए केवल एक ही समुदाय मायने रखता है।
“भाजपा करती है सबका सम्मान”
ब्रजेश पाठक ने भाजपा की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने कार्यों से सम्मान दिया है।ओबीसी कमीशन बनाकर पिछड़ों को संवैधानिक अधिकार दिए।दो बार दलित राष्ट्रपति बनाकर दलित समाज का गौरव बढ़ाया।एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाकर अल्पसंख्यकों का वास्तविक सम्मान किया।



