
मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में शनिवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने समाज की पुरानी और दकियानूसी सोच को झकझोर कर रख दिया। रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी इकलौती बेटी प्रणिता शर्मा के तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर मातम मनाने के बजाय, ढोल-नगाड़ों और फूलों के साथ उसका स्वागत किया। यह वाकया अब सोशल मीडिया पर ‘बेटी के आत्मसम्मान’ की नई मिसाल के रूप में चर्चा का विषय बना हुआ है।
8 साल का मानसिक उत्पीड़न और फिर साहस का फैसला
शास्त्रीनगर निवासी प्रणिता का विवाह दिसंबर 2018 में शाहजहांपुर के मेजर गौरव अग्निहोत्री के साथ हुआ था। परिजनों के अनुसार शादी के कुछ समय बाद ही प्रणिता को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। एक बेटा होने के बावजूद ससुराल पक्ष के व्यवहार में कोई सुधार नहीं हुआ।आखिरकार, प्रणिता ने मेरठ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी, जिसे शनिवार को अदालत ने मंजूरी दे दी।
‘I Love My Daughter’: थीम बेस्ड सेलिब्रेशन और जश्न
तलाक की डिक्री मिलते ही कोर्ट परिसर से लेकर घर तक का नजारा किसी उत्सव जैसा था। प्रणिता के स्वागत के लिए परिवार के सदस्यों ने काले रंग की विशेष टी-शर्ट पहनी थी, जिस पर प्रणिता की फोटो के साथ “I Love My Daughter” लिखा था।पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा, “मेरी बेटी बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी, तो उसकी वापसी भी उसी सम्मान के साथ होनी चाहिए। वह कोई सामान नहीं है जिसे फेंक दिया जाए, वह मेरे परिवार का गौरव है।पिता ने ससुराल पक्ष से कोई भी एलीमनी (भत्ता) या सामान वापस लेने से इनकार कर दिया और केवल अपनी बेटी की खुशहाली को प्राथमिकता दी।
शिक्षित और स्वतंत्र बनें महिलाएं: प्रणिता का संदेश
मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुकीं और वर्तमान में एक प्रतिष्ठित कंपनी में फाइनेंस डायरेक्टर के पद पर कार्यरत प्रणिता शर्मा ने समाज की अन्य महिलाओं के लिए एक सशक्त संदेश दिया है।”महिलाओं को शादी से पहले शिक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहिए। यदि आप किसी भी प्रकार की हिंसा या प्रताड़ना का शिकार हैं, तो चुप रहकर उसे सहने के बजाय अपने आत्मसम्मान के लिए आवाज उठाएं। खुद को मजबूत बनाएं।”
इस घटना ने यह संदेश दिया है कि एक बेटी के लिए उसके पिता का घर हमेशा खुला है और तलाक जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक गरिमामय जीवन की नई शुरुआत हो सकता है।



