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Jharkhand: झारखंड हाई कोर्ट ने हजारीबाग कांड पर लिया ‘स्वतः संज्ञान’,जनहित याचिका में तब्दील हुआ मामला

रांची: हजारीबाग के विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय नाबालिग के साथ हुई दरिंदगी और हत्या के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और हजारीबाग एसपी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी का आदेश दिया है।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘सलाखों के पीछे भेजें दरिंदे

न्यायमूर्ति सुजीत प्रसाद की अदालत में अधिवक्ता हेमंत कुमार सिकरवार द्वारा अखबार की प्रतिलिपि पेश किए जाने के बाद खंडपीठ ने इस पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मामले को जनहित याचिका में तब्दील कर मुख्य न्यायमूर्ति की अदालत में ट्रांसफर कर दिया है।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए वह कम है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि गृह सचिव और डीजीपी यह सुनिश्चित करें कि आरोपी जल्द से जल्द सलाखों के पीछे हों।मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए और अब तक की जांच का ब्योरा दिया।

क्या है पूरा मामला?

घटना बीते 24 मार्च की है, जिसने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है।विष्णुगढ़ में 12 साल की मासूम बच्ची घर से सामान लेने निकली थी, तभी उसे अगवा कर जंगल ले जाया गया। वहां दरिंदों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर निर्मम हत्या कर दी।घटना के 6 दिन बीत जाने के बावजूद मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिसे लेकर जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

हजारीबाग बंद: सड़क पर उतरा जनसैलाब

अकेले कानून ही नहीं, बल्कि आम जनता और राजनीतिक दल भी इंसाफ की मांग को लेकर मुखर हैं। भाजपा के आह्वान पर आज यानी 30 मार्च को हजारीबाग पूरी तरह बंद रहा। शहर की सभी दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।प्रदर्शनकारियों और पीड़ित परिवार ने मांग की है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाए और दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। जमशेदपुर से लेकर रांची तक इस घटना के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं, जिससे हेमंत सोरेन सरकार और पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव है।

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