Jharkhand :दिल्ली के राष्ट्रीय साहित्य उत्सव में गूंजेगी ‘हो’ भाषा की गूंज, साहित्यकार जवाहरलाल बांकिरा करेंगे झारखंड का प्रतिनिधित्व

चाईबासा : राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रीय साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय कवि सम्मेलन साहित्य उत्सव’ में इस वर्ष झारखंड की जनजातीय अस्मिता और संवेदनाओं को राष्ट्रीय पटल पर पहचान मिलेगी। वेस्ट सिंहभूम ‘हो’ राइटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और प्रख्यात साहित्यकार जवाहरलाल बांकिरा को इस उत्सव में झारखंड का प्रतिनिधित्व करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
‘देशज स्वर’ में गूंजेंगी पलायन और पर्यावरण की पीड़ा
30 मार्च से 4 अप्रैल तक चलने वाले इस साहित्य महाकुंभ में श्री बांकिरा ‘देशज स्वर’ कार्यक्रम के अंतर्गत आदिवासी कविता पाठ करेंगे। उनकी कविताओं के मुख्य विषय झारखंड की ज्वलंत समस्याओं पर आधारित हैं। उनकी प्रमुख कविता ‘डाडु सेनो:यना नला बासा’ (डाडू चला कमाने परदेश) उन जनजातीय युवाओं की व्यथा को दर्शाती है, जो मजबूरी में अपने घर-खलिहान छोड़कर दूसरे प्रदेशों में दिहाड़ी मजदूरी करने को विवश हैं।
दूसरी महत्वपूर्ण रचना ‘सारंडा बुरु अमिङो: तना’ (सारंडा जंगल नष्ट हो रहा है) के माध्यम से वे कटते वनों और विलुप्त होती प्राकृतिक संपदा पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करेंगे।
जनजातीय जीवन के सजग प्रहरी
जवाहरलाल बांकिरा अपनी रचनाओं के माध्यम से जनजातीय समाज के धुंधले होते सामाजिक ताने-बाने और सांस्कृतिक पहचान को बचाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनकी इसी सक्रियता और संवेदनशीलता को देखते हुए साहित्य अकादमी ने उन्हें इस राष्ट्रीय मंच पर आमंत्रित किया है।
साहित्य जगत में हर्ष की लहर
राष्ट्रीय स्तर पर श्री बांकिरा के चयन से पश्चिमी सिंहभूम के साहित्यकारों और ‘हो’ भाषा प्रेमियों में भारी उत्साह है। हो राइटर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है। सचिव कृष्णा देवगम, संयुक्त सचिव दिलदार पुरती, संगठन सचिव सिकंदर बुड़ीउली, शायरा सारिका पुरती सुंडी, और साहित्यकार तिलक बारी, सोनू हेस्सा, जगन्नाथ हेस्सा व सोनी कुमारी ने इसे ‘हो’ साहित्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है।
जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से क्षेत्रीय भाषाओं को राष्ट्रीय पहचान मिलती है और नई पीढ़ी अपने मूल साहित्य की ओर आकर्षित होती है।



