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Rajasthan : श्मशान में उड़ती है चिता की राख, काशी की तर्ज पर ‘पंचमुखी मोक्षधाम’ में खेली गई अद्भुत भस्म होली

भीलवाड़ा: जहां एक ओर पूरे देश में लोग रंगों और गुलाल से होली खेलते हैं, वहीं राजस्थान के भीलवाड़ा में होली का एक ऐसा रूप देखने को मिलता है जिसे देख दुनिया दंग रह जाती है। शहर के पंचमुखी मोक्षधाम में आधी रात को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने रंगों से नहीं, बल्कि चिता की भस्म से होली खेली। काशी के मणिकर्णिका घाट की तर्ज पर होने वाली यह परंपरा अब भीलवाड़ा की पहचान बन चुकी है।

श्मशान में गूंजे जयकारे, ढोल-नगाड़ों पर थिरके भक्त

जिस श्मशान में लोग दिन में जाने से डरते हैं, वहां होली की रात नजारा बिल्कुल अलग था। ढोल-नगाड़ों की गूंज, हाथों में मशाल और चारों ओर ‘जय भैरव बाबा’ के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। रात के अंधेरे में आरती की रोशनी और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी।

भैरव बाबा की पालकी और भस्म का खेल

श्री मसानिया भैरवनाथ मंदिर से बाबा की भव्य पालकी निकाली गई। श्रद्धालु पालकी के साथ मोक्षधाम परिसर में घूमे और एक-दूसरे पर दाह संस्कार की राख (भस्म) उड़ाई। समिति के अध्यक्ष रवि कुमार ने बताया कि यह परंपरा पिछले 18 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। यहां सबसे पहले श्मशान की राख से तैयार भस्म बाबा को अर्पित की जाती है, फिर उसे भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

धार्मिक महत्व: क्लेश और रोगों का होता है नाश

मंदिर के पुजारी संतोष कुमार के अनुसार, चिता भस्म का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने से काल, क्लेश, रोग और दोषों का नाश होता है।श्रद्धालु इस भस्म को घर ले जाते हैं ताकि जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे। पालकी विभिन्न श्मशान घाटों पर रुकती है, जहाँ आरती कर बाबा का आशीर्वाद लिया जाता है।

सालभर रहता है भक्तों को इंतजार

भक्तों का विश्वास है कि बाबा भैरवनाथ उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस अनूठे उत्सव में बच्चे, महिलाएं और पुरुष सभी समान उत्साह के साथ शामिल होते हैं। आधी रात के बाद तक डीजे की धुन पर भक्ति और नृत्य का यह सिलसिला चलता रहा। कई श्रद्धालु पारंपरिक अंदाज में हाथों में तलवार और कटार लेकर नृत्य करते भी नजर आए।

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