Jharkhand: गिरिडीह में एसआईआर के दौरान बवाल, फॉर्म -7 को लेकर ग्रामीणों ने दो लोगों को बनाया बंधक

गिरिडीह: गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म -7 को लेकर विवाद खड़ा हो गया। गांडेय प्रखंड की बुधुडीह पंचायत के सुजना बूथ संख्या-303 में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म-7 भरे जाने का आरोप लगाया गया है।मामले को लेकर ग्रामीणों ने दो लोगों को काफी देर तक अपने कब्जे में रखा। ग्रामीणों ने बीएलओ की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की। सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया।
करीब 50 मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 50 महिला-पुरुष मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म-7 भरा गया था। इनमें मोहम्मद रकीब, मोहम्मद नसीरुद्दीन, जुबेदा बीबी, रुखसाना खातून, हसीना खातून, हसीना बीबी, रकीब अंसारी, हैदर अली, अब्दुर रकीब और असमा खातून समेत अन्य लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं।ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित फॉर्म बीएलओ के पास जमा किए गए और उन पर हस्ताक्षर भी किए गए। इसी को लेकर ग्रामीणों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
दो लोगों को ग्रामीणों ने बनाया बंधक
जानकारी के अनुसार, सुजना निवासी दिलचंद पंडित और मधु दत्ता करीब 50 महिला-पुरुषों के नाम से भरे हुए फॉर्म-7 लेकर बीएलओ दिनिता हांसदा के पास पहुंचे थे। ग्रामीणों को इस प्रक्रिया पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने दोनों को पकड़ लिया और काफी देर तक बंधक बनाकर रखा।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरे जाने की प्रक्रिया संदिग्ध है।
बीएलओ पर बिना जांच हस्ताक्षर करने का आरोप
झामुमो पंचायत अध्यक्ष मोहम्मद आफताब सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वैध मतदाताओं के नाम हटाने के लिए भरे गए फॉर्म-7 पर बीएलओ ने बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के हस्ताक्षर कर दिए।ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की।हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
दोनों युवकों ने खुद को बताया निर्दोष
ग्रामीणों के कब्जे में आए दोनों युवकों ने खुद को निर्दोष बताया। उनका कहना था कि उन्हें बीजेपी के एक नेता की ओर से फॉर्म-7 दिए गए थे और उन्होंने केवल फॉर्म जमा करने का काम किया।उनका कहना है कि फॉर्म में दिए गए विवरण की जांच करना और आगे की प्रक्रिया पूरी करना बीएलओ की जिम्मेदारी है। इस दावे की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मौके पर पहुंचा प्रशासन और पुलिस बल
मामले की सूचना मिलते ही गांडेय बीडीओ निसात अंजुम, सीओ ओम प्रकाश बड़ाईक और अहिल्यापुर थाना प्रभारी ऐनुल हक खान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया और पूरे मामले की जांच एवं सत्यापन का आश्वासन दिया। इसके बाद दोनों लोगों को ग्रामीणों के कब्जे से मुक्त कराया गया।
जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन
गांडेय बीडीओ निसात अंजुम और सीओ ओम प्रकाश बड़ाईक ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। अधिकारियों के अनुसार, यदि बिना विधिवत जांच-पड़ताल के फॉर्म-7 भरे गए या उन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, तो संबंधित बीएलओ और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच और मतदाता सूची से जुड़े दावों के सत्यापन में जुटा है।



