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Jharkhand: टाटा स्टील यूआईएसएल को मिला जीईईएफ ग्लोबल वाटरटेक अवार्ड 2026, जल प्रबंधन में बनी ‘कंपनी ऑफ द ईयर’

जमशेदपुर: टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (टाटा स्टील यूआईएसएल ) ने जल प्रबंधन और अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को प्रतिष्ठित ” ग्लोबल वाटरटेक अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया है।टाटा स्टील यूआईएसएल को “इंटीग्रेटेड वाटर एंड वेस्टवॉटर मैनेजमेंट कंपनी ऑफ द ईयर 2026” श्रेणी में यह सम्मान प्रदान किया गया।

नई दिल्ली के अशोक होटल में आयोजित हुआ पुरस्कार समारोह

यह पुरस्कार समारोह नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित अशोक होटल में आयोजित किया गया। यह सम्मान ग्लोबल एनर्जी एंड एनवायरनमेंट फाउंडेशन की ओर से जल उद्योग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थानों और संगठनों को दिया जाता है।इस मंच के माध्यम से जल, अपशिष्ट जल और डिसेलिनेशन क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी उत्कृष्टता, जल संरक्षण और सतत विकास से जुड़े उल्लेखनीय कार्यों को पहचान दी जाती है।

जमशेदपुर में सीवेज ट्रीटमेंट और जल पुनर्चक्रण की पहल को मिली पहचान

पुरस्कार समारोह के दौरान टाटा स्टील यूआईएसएल ने जमशेदपुर टाउनशिप में संचालित अपनी सीवेज ट्रीटमेंट, जल पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग की पहल को प्रस्तुत किया।कंपनी के अनुसार, अपशिष्ट जल के अधिकतम पुनर्चक्रण और उसके औद्योगिक एवं उद्यानिकी कार्यों में उपयोग के माध्यम से वाटर न्यूट्रैलिटी के लक्ष्य की दिशा में काम किया जा रहा है। इस पहल से नदियों और अन्य स्रोतों से ताजे पानी की निकासी में भी कमी लाने का प्रयास किया गया है।

आधुनिक वेस्टवॉटर मैनेजमेंट पर जोर

टाटा स्टील यूआईएसएल द्वारा अपनाई गई आधुनिक अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर केंद्रित है। कंपनी की विभिन्न जल प्रबंधन पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप बताई गई हैं।इनमें प्रमुख रूप से एसडीजी 6: स्वच्छ जल एवं स्वच्छता,एसडीजी 9: उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना,एसडीजी 11: सतत शहर एवं समुदाय और एसडीजी 12: जिम्मेदार उपभोग एवं उत्पादन शामिल हैं

जल संरक्षण के क्षेत्र में मिली वैश्विक पहचान

इस सम्मान को टाटा स्टील यूआईएसएल की जल संरक्षण, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है। कंपनी की पहल यह भी दर्शाती है कि शहरी जल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक और पुनर्चक्रण के माध्यम से ताजे जल संसाधनों पर निर्भरता कम की जा सकती है।

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