Jharkhand: मैथन में 223 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का विरोध तेज, विस्थापित ग्रामीणों ने जेसीबी से चल रहा काम रुकवाया

मैथन: दामोदर घाटी निगम मैथन की ओर से प्रस्तावित 223 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को गोगना स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल के समीप डीवीसी प्रबंधन जेसीबी लगाकर जमीन समतल कराने पहुंचा, लेकिन सैकड़ों विस्थापित ग्रामीणों ने कार्यस्थल को घेरकर काम बंद करा दिया। विरोध के बाद प्रबंधन के कर्मचारियों को वापस लौटना पड़ा।सूचना मिलते ही गोगना के ग्रामीण काले झंडे और पारंपरिक हथियार लेकर मार्च करते हुए मौके पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने डीवीसी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने ‘डीवीसी प्रबंधन मुर्दाबाद’ और ‘विस्थापित एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए प्रस्तावित परियोजना का विरोध किया।
दशकों बाद भी विस्थापितों को नहीं मिली बुनियादी सुविधाएं
विस्थापित ग्रामीणों का आरोप है कि डीवीसी ने दशकों पहले बांध निर्माण के लिए उनकी हजारों एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। उस समय प्रभावित परिवारों को नौकरी, बिजली, पानी, सड़क और अस्पताल जैसी सुविधाएं देने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि इतने वर्षों बाद भी वादे पूरे नहीं हुए हैं और आज भी कई गांवों में पेयजल तथा बिजली की समस्या बनी हुई है।ग्रामीणों का कहना है कि पुराने विस्थापितों की समस्याओं का समाधान किए बिना डीवीसी एक नई परियोजना शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इससे मैथन डैम पर निर्भर मछुआरों और नाविकों की आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका है।
सोलर पैनल से मछुआरों और नाविकों की आजीविका पर असर की आशंका
ग्रामीण उमेश सोरेन ने कहा कि डीवीसी ने उनकी जमीन पर अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया, लेकिन विस्थापित परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब फ्लोटिंग सोलर प्लांट के जरिए मैथन डैम के मछुआरों और नाविकों को भी उजाड़ने की तैयारी की जा रही है।उमेश सोरेन के मुताबिक, डैम में सोलर पैनल लगाने से मछलियों और नावों के संचालन पर असर पड़ सकता है। इससे मछुआरों और नाविकों की आजीविका संकट में आ सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर परियोजना को स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रखंड प्रमुख ने विस्थापितों के आंदोलन का किया समर्थन
मामले पर एग्यारकुंड प्रखंड प्रमुख संगीता महतो ने विस्थापितों के आंदोलन को जायज बताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की जमीन पहले अधिग्रहित की गई थी, उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है। उनका आरोप है कि डीवीसी प्रबंधन बिना ग्रामसभा और जनसुनवाई के परियोजना को आगे बढ़ाना चाहता है।संगीता महतो ने कहा कि पहले विस्थापित परिवारों को जमीन का मुआवजा, नौकरी और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके बाद ही नई परियोजना पर बात होनी चाहिए।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डीवीसी प्रबंधन ने जबरन काम जारी रखने की कोशिश की, तो आंदोलन और व्यापक होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी डीवीसी प्रबंधन की होगी।फिलहाल प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना को लेकर विस्थापित ग्रामीणों और डीवीसी प्रबंधन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हैं और परियोजना का काम शुरू नहीं होने देने की चेतावनी दे रहे हैं।



