Jharkhand: झारखंड में एसआईआर विवाद ने पकड़ा तूल, जेएमएम ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की

रांची: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर देश में चल रहा विवाद अब झारखंड तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा एसआइआर से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों पर आपत्ति जताए जाने संबंधी रिपोर्ट सामने आने के बाद झारखंड में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।राज्य सरकार में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। वहीं, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को मीडिया रिपोर्टों पर आधारित बताते हुए खारिज किया है। चुनाव आयोग ने भी कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है तथा एसआईआर से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

शिल्पी नेहा तिर्की ने निर्णय प्रक्रिया पर उठाए सवाल

हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि यदि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में निर्णय लेने के दौरान अन्य चुनाव आयुक्तों के इनपुट और आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया है, तो यह गंभीर विषय है।उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और संस्थागत स्वायत्तता बनाए रखने पर जोर दिया। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता जरूरी है।

जेएमएम ने सीईसी के इस्तीफे की मांग की

जेएमएम के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने भी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पहले से ही एसआईआर की प्रक्रिया पर आपत्ति जताती रही है।विनोद पांडे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने एसआईआर को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। यह जेएमएम का राजनीतिक आरोप है; चुनाव आयोग ने एसआईआर से जुड़े अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है।

चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

23 सितंबर को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, चुनावी डेटा तक पहुंच और एसआईआर से जुड़ी प्रक्रियाओं से बताया गया है।हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा है कि आयोग के भीतर लिखित नोट, सुझाव और अलग-अलग राय आना सामान्य आंतरिक प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक एसआईआर समेत उसके सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

झारखंड में एसआईआर को लेकर पहले से राजनीतिक बहस

झारखंड में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस ने भी राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को ज्ञापन देकर एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत की है। पार्टी ने चतरा जिले में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।राज्य में मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया भी चल रही है। 30 सितंबर की समयसीमा नजदीक आने के बीच करीब 9.8 लाख दावे और आपत्तियां मिलने की रिपोर्ट सामने आई है।

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को बताया आधारहीन

भाजपा की ओर से विपक्ष के आरोपों को खारिज किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मीडिया रिपोर्टों के आधार पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक स्तर पर अलग-अलग सुझाव और मत दर्ज होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है और एसआईआर से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों के आरोपों और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बीच विवाद जारी है।

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