Bihar: भवन निर्माण निगम के जीएम कमलेश कुमार पर ईओयू का बड़ा एक्शन, 3.12 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति मामले में पैतृक आवास समेत 4 ठिकानों पर रेड

पटना : बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ चल रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत आर्थिक अपराध इकाई ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक (तकनीकी) कमलेश कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज करते हुए उनकी अवैध संपत्तियों को खंगालना शुरू कर दिया है। कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद ईओयू की चार विशेष टीमों ने उनके पैतृक गांव समेत चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
जंदाहा स्थित पैतृक आवास पर 8:30 घंटे तक चली सघन छापेमारी
कार्रवाई के दौरान वैशाली जिले के जंदाहा प्रखंड अंतर्गत सर्वोदय मैदान स्थित उनके पैतृक घर पर हलचल बनी रही। मंगलवार सुबह करीब 8:00 बजे ईओयू की टीम स्थानीय पुलिस बल के साथ जंदाहा स्थित कमलेश कुमार के पैतृक आवास पर पहुंची।टीम ने घर में मौजूद परिजनों से साढ़े आठ घंटे तक मैराथन पूछताछ की। शाम करीब 4:30 बजे जांच खत्म कर टीम वापस लौटी। इस दौरान जमीन, मकान और बैंक खातों से जुड़े दर्जनों दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की गई।
आय से 103.30% अधिक संपत्ति: 3.12 करोड़ के अवैध आय का खुलासा
ईओयू की इस बड़ी कार्रवाई का आधार अधिकारी के खिलाफ गुप्त सत्यापन में मिले पुख्ता सबूत बने। प्राथमिक जांच और गोपनीय सत्यापन के बाद कमलेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।जांच में अधिकारी के पास उनकी ज्ञात आय के वैध स्रोतों से 3,12,51,000 रुपये (तीन करोड़ बारह लाख इक्यावन हजार रुपये) की अतिरिक्त संपत्ति पाई गई है। यह राशि उनकी वैध कमाई और सैलरी से 103.30 प्रतिशत अधिक है, जिसे पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का परिणाम माना जा रहा है।
4 विशेष टीमों ने मारा छापा , जब्ती पर ईओयू की साधी चुप्पी
विशेष न्यायालय (निगरानी), पटना से सर्च वारंट हासिल करने के बाद ईओयू के पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में गठित चार विशेष टीमों ने कमलेश कुमार के पटना व अन्य ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।हालांकि, घंटों चली रेड के बाद बरामदगी, अचल संपत्तियों के दस्तावेज, सोने-चांदी या आभूषणों की जब्ती के सवाल पर छापेमारी दल के अधिकारियों ने मीडिया से कोई भी जानकारी साझा करने से फिलहाल इनकार कर दिया। ईओयू सूत्रों का कहना है कि सभी ठिकानों से मिले दस्तावेजों के आकलन के बाद आधिकारिक आंकड़ा जारी किया जाएगा और आरोपी अधिकारी के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



