जमशेदपुर: जुगसलाई में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विहिप झारखंड की दुर्गा वाहिनी संयोजिका कृति गौरव मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुईं। इस दौरान हिंदू समाज को संगठित करने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और धर्मांतरण रोकने जैसे विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
हिंदू समाज को संगठित करना विहिप का उद्देश्य: कृति गौरव
मुख्य वक्ता कृति गौरव ने कहा कि विहिप का 62वां स्थापना दिवस झारखंड के सभी जिलों में विभिन्न स्थानों पर मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विहिप का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना है।उन्होंने सभी हिंदुओं को एकजुट रहने का संदेश देते हुए कहा कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम में ‘सभी हिंदू एक हैं’ का संकल्प भी लिया गया।
हनुमान जी के उदाहरण से संगठन की शक्ति समझाई
कृति गौरव ने हनुमान जी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराया गया था, उसी प्रकार हिंदू समाज को भी अपनी सामूहिक शक्ति को पहचानने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि संगठित समाज कठिन से कठिन कार्य को भी पूरा कर सकता है। उनके अनुसार सामाजिक समरसता के माध्यम से समाज में एकता को मजबूत करना जरूरी है।
धर्मांतरण और सामाजिक भेदभाव पर चिंता जताई
कृति गौरव ने धर्मांतरण और जातिगत विभाजन को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों के बीच सामाजिक समरसता बढ़ाने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को जाति के आधार पर बंटने के बजाय सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहिए। उनके अनुसार समाज के बीच जाकर लोगों को जागरूक करना और सामाजिक एकता को मजबूत करना जरूरी है।उन्होंने भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार श्रीराम ने विभिन्न वर्गों और प्रकृति के प्राणियों को साथ लेकर रावण का सामना किया, उसी प्रकार समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ का दिया संदेश
विहिप सिंहभूम विभाग मंत्री अरुण सिंह ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद एक विश्वव्यापी संगठन है। उन्होंने संगठन के प्रतीक विशाल बरगद के पेड़ का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार बरगद की शाखाएं चारों दिशाओं में फैलती हैं, उसी प्रकार विहिप का कार्य भी विभिन्न क्षेत्रों में फैला हुआ है।उन्होंने ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ का संदेश देते हुए कहा कि धर्म की रक्षा करने वालों की धर्म रक्षा करता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा धर्म की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र धारण करने का उदाहरण भी दिया।
1964 में हुई थी विश्व हिंदू परिषद की स्थापना
अरुण सिंह ने कहा कि आजादी के बाद देश में हिंदुओं के हितों और धार्मिक-सामाजिक मुद्दों को लेकर चिंता के बीच विश्व हिंदू परिषद की स्थापना की गई। उन्होंने बताया कि 1964 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुंबई के सांदीपनि आश्रम में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना हुई थी।उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य हिंदू समाज को जागरूक और संगठित करना है।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में विहिप जमशेदपुर महानगर जिलाध्यक्ष अजय गुप्ता, जिलामंत्री चंद्रिका भगत, मातृशक्ति जमशेदपुर महानगर प्रमुख एम. भवानी सहित समाज के कई सम्मानित सदस्य और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
