भागलपुर। जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। भागलपुर शहर से लेकर दियारा क्षेत्रों तक निचले इलाकों में पानी फैल गया है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी घरों और आवासीय परिसरों में प्रवेश कर गया है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कॉलोनी और महिला छात्रावास भी बाढ़ के पानी से प्रभावित बताए जा रहे हैं।बाढ़ का असर सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं है। सबौर प्रखंड के शंकरपुर सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। सैकड़ों एकड़ में लगी सब्जी की फसल डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं, बाढ़ की स्थिति का असर भागलपुर के प्रसिद्ध सिल्क कारोबार पर भी पड़ने लगा है।
12 घंटे में दो सेंटीमीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर
बुधवार शाम 6 बजे से गुरुवार सुबह 6 बजे तक 12 घंटे के दौरान गंगा के जलस्तर में करीब दो सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद भागलपुर में गंगा का जलस्तर 33.52 मीटर पहुंच गया।हालांकि, यहां खतरे का निशान 33.68 मीटर है और नदी अभी खतरे के निशान से करीब 16 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। जलस्तर में फिलहाल कुछ स्थिरता का रुझान दिखाई दे रहा है, लेकिन निचले इलाकों में पहले से जमा पानी के कारण लोगों की मुश्किलें बरकरार हैं।नेपाल में बाढ़ और जल प्रलय की खबरों के बीच स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। लोगों को आशंका है कि आने वाले दिनों में जलस्तर में फिर बढ़ोतरी हो सकती है।
प्रभावित लोगों को सहायता का इंतजार
बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों का कहना है कि उन्हें अब तक पर्याप्त राहत या सहायता नहीं मिल सकी है। आपदा विभाग की ओर से बताया गया है कि निर्धारित मानकों के अनुसार फिलहाल सहायता उपलब्ध कराने की स्थिति नहीं बनी है।इससे बाढ़ प्रभावित परिवारों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई इलाकों में पानी जमा होने के कारण लोगों को दैनिक जरूरतों को पूरा करने और घरों से बाहर निकलने में कठिनाई हो रही है।
नाथनगर में रातभर पांच सेंटीमीटर बढ़ा पानी
नाथनगर प्रखंड में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। लोगों को उम्मीद थी कि पानी का स्तर धीरे-धीरे कम होगा, लेकिन रात के दौरान जलस्तर में करीब पांच सेंटीमीटर की वृद्धि हो गई।बैरिया पंचायत के सरपंच आशुतोष कुमार के अनुसार, रात में बाढ़ का पानी करीब पांच सेंटीमीटर बढ़ा है। इससे उन परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जो अब तक अपने गांव या घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर नहीं गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
नवगछिया में गंगा और कोसी का पानी खेतों तक पहुंचा
नवगछिया क्षेत्र में भी बाढ़ का असर बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटे के दौरान गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में करीब पांच से सात सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों और खेतों में पानी फैलने लगा है। खेतों में लगी फसलें डूब रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ मवेशियों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है।इस्माइलपुर, गोपालपुर और नवगछिया के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। इस्माइलपुर क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं।
सुल्तानगंज में अंतिम संस्कार करना भी मुश्किल
सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम में गंगा का जलस्तर बढ़ने से मुक्तिधाम और कच्चा श्मशान घाट भी प्रभावित हो गया है। नगर परिषद द्वारा निर्मित मुक्तिधाम चारों तरफ से पानी से घिर गया है।घाट पर पानी भरने के कारण शवों के अंतिम संस्कार में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग किसी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।महेशी और गनगनियां पंचायतों के निचले हिस्सों में भी पानी फैलने लगा है। सैकड़ों एकड़ में लगी मक्के की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। कल्याणपुर-मोतीचक गांव के लोगों को जरूरी कामों के लिए टीन से बनी अस्थायी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में अभी भी पर्याप्त प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है।
कहलगांव और पीरपैंती में भी बढ़ी परेशानी
कहलगांव में गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। गंगा से जुड़ी अन्य नदियां भी उफान पर हैं। कई गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है।ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।वहीं, पीरपैंती के चौखंडी के पास दो वर्ष पहले बाढ़ में ध्वस्त हुए पुल के समीप खेतों के रास्ते बनाया गया वैकल्पिक कच्चा मार्ग भी जलमग्न हो गया है। इससे बाखरपुर पूर्वी, बाखरपुर पश्चिमी, बाबूपुर समेत दियारा क्षेत्र के दर्जनभर गांवों के लोगों का संपर्क प्रभावित हुआ है।टपुआ गांव चारों तरफ से पानी से घिरने के कारण टापू जैसी स्थिति में पहुंच गया है।
खेतों तक पहुंचा पानी, गांवों की ओर बढ़ने की आशंका
रानीदियारा, एकचारी दियारा, खवासपुर, बाबूपुर टोला, बाखरपुर, मोहनपुर और मधुबन पंचायतों के निचले इलाकों में खेतों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कई जगह पानी धीरे-धीरे गांवों की ओर बढ़ रहा है।हालांकि, फिलहाल किसी विद्यालय में पानी पहुंचने या बड़े पैमाने पर लोगों के पलायन की सूचना सामने नहीं आई है। इसके बावजूद ग्रामीण लगातार जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
राघोपुर जमींदारी बांध पर फिर शुरू हुआ तेज कटाव
खरीक प्रखंड के राघोपुर जमींदारी बांध पर गंगा का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। देर रात बांध के अपस्ट्रीम हिस्से में करीब 30 मीटर क्षेत्र में एक बार फिर तेज कटाव शुरू हो गया।कटाव बढ़ने से बांध की सुरक्षा को लेकर आसपास के ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटाव पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।कटाव की सूचना मिलने के बाद जल संसाधन विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। विभागीय अधिकारियों की निगरानी में कटावरोधी कार्य कराया जा रहा है और बांध की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
नाव पलटने के बाद लापता दो लोगों की तलाश जारी
इधर, गंगा नदी में नाव पलटने की घटना के बाद लापता नाविक और एक मजदूर की तलाश भी जारी है। स्थानीय लोगों के साथ प्रशासन और संबंधित बचाव दल नदी में लगातार खोज अभियान चला रहे हैं।देर रात तक दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया था। एक ओर नाव हादसे के बाद लापता लोगों की तलाश जारी है, वहीं दूसरी ओर गंगा के बढ़ते जलस्तर और राघोपुर जमींदारी बांध पर हो रहे कटाव ने जिले के लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था मजबूत करने, बांध की लगातार निगरानी करने और कटावरोधी कार्य में तेजी लाने की मांग की है।
