Bihar: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 में बिहार की दो शिक्षिकाओं का चयन, 5 सितंबर को राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

पटना: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए बिहार की दो शिक्षिकाओं का चयन किया गया है। शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से जारी सूची में गोपालगंज की पुष्पा प्रसाद और बांका की खुशबू कुमारी का नाम शामिल है। दोनों शिक्षिकाओं को 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

गोपालगंज की पुष्पा प्रसाद का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन

गोपालगंज की पुष्पा प्रसाद राजकीय कन्या मध्य विद्यालय, कुचायकोट में शिक्षिका हैं। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए उनके चयन की खबर से जिले के शिक्षा जगत में खुशी का माहौल है।पुष्पा प्रसाद को 5 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

बांका की खुशबू कुमारी भी पुरस्कार के लिए चुनी गईं

बिहार से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित दूसरी शिक्षिका खुशबू कुमारी हैं। वह बांका के बिदायदिह स्थित उर्दू प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत हैं।दोनों शिक्षिकाओं के चयन को बिहार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की शिक्षिकाओं को मिलने वाला यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की पहचान है।

देशभर से 11 शिक्षकों का चयन

शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी सूची के अनुसार इस वर्ष अलग-अलग राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और संबंधित शैक्षणिक संस्थानों से कुल 11 शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है।सूची में शामिल प्रमुख नामों में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह: जे. प्रकाश राव,आंध्र प्रदेश: राजेश कौलुरी,अरुणाचल प्रदेश: याकू तामे,असम: राजेश बरदोलोई ,सीआईसीएसइ : राधा राजेश,सीबीएसई : संगीता यादव,चंडीगढ़: रवि जायसवाल,छत्तीसगढ़: सुनीता यादव, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव: पटेल पूर्णिमा मोहनलाल,बिहार: पुष्पा प्रसाद, बिहार: खुशबू कुमारी शामिल है। सभी चयनित शिक्षकों को 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति सम्मानित करेंगी।

बिहार की दोनों शिक्षिकाओं के चयन से शिक्षा जगत में उत्साह

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए बिहार की दो शिक्षिकाओं का चयन राज्य के लिए गौरव की बात है। गोपालगंज और बांका की शिक्षिकाओं को मिलने वाला यह राष्ट्रीय सम्मान विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को नई पहचान देगा।

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