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Bihar: बिहार में शराब तस्करी का अनोखा तरीका, घोड़े पर लदी 52.56 लीटर विदेशी शराब बरामद

पूर्वी चंपारण। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद शराब तस्करी के लिए माफिया लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। पूर्वी चंपारण के पहाड़पुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने शनिवार तड़के ऐसे ही एक मामले का खुलासा किया, जहां तस्करी के लिए घोड़े का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने शराब लदे घोड़े को बरामद करने के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है।

घोड़े पर लादकर ले जा रहा था विदेशी शराब

थानाध्यक्ष अजय कुमार के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति घोड़े पर विदेशी शराब लादकर तस्करी कर रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने लउकाहां गांव के पास घेराबंदी की।पुलिस को देखते ही संदिग्ध घुड़सवार घोड़े को वहीं छोड़कर पास के गहरे पानी में कूद गया और पानी में छिप गया।

घोड़े से मिली 52.56 लीटर शराब

पुलिस ने घोड़े की तलाशी ली तो उसके ऊपर लदी विभिन्न ब्रांडों की करीब 52.56 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने तस्कर के संभावित भागने के रास्तों को बंद कर दिया और पानी में उसकी तलाश शुरू की।काफी देर तक पानी में छिपे रहने के बाद सुबह रोशनी होने पर पुलिसकर्मियों को पानी की सतह पर उसके सिर के बाल दिखाई दिए। इसके बाद जवानों ने मशक्कत कर उसे पानी से बाहर निकाला और गिरफ्तार कर लिया।

पश्चिमी चंपारण का रहने वाला है आरोपी

गिरफ्तार आरोपी की पहचान राहुल कुमार, पिता विक्रम यादव, निवासी तेलुआ ब्रम टोला, नौतन थाना क्षेत्र, पश्चिमी चंपारण के रूप में हुई है।छापेमारी अभियान में एएसआई राजू कुमार गुप्ता समेत पुलिस बल के जवान शामिल रहे। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर शराब तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और सप्लायरों के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

दियारा क्षेत्रों में पहले भी हुआ है घोड़े का इस्तेमाल

पुलिस के अनुसार दियारा और सीमावर्ती इलाकों में शराब तस्करी के लिए घोड़ों के इस्तेमाल का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 27-28 मई 2025 को बेतिया के नौतन थाना क्षेत्र स्थित गंडक दियारा में भी पुलिस ने घोड़े पर लदी करीब 49.95 लीटर विदेशी शराब बरामद की थी।उस मामले में तस्कर अंधेरे और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर भाग गए थे।

ड्रोन निगरानी से बचने के लिए बदला तरीका

सड़कों पर वाहन जांच और दियारा क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी बढ़ने के बाद तस्कर कथित तौर पर कच्चे और दुर्गम रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे रास्तों पर घोड़ों को वाहनों की तुलना में अधिक सुविधाजनक मानकर तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।पहाड़पुर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

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