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Jharkhand: गिरिडीह पुलिस को बड़ी सफलता, 12 मामलों में वांछित माओवादी एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू ने किया आत्मसमर्पण

गिरिडीह: नक्सल विरोधी अभियान के तहत गिरिडीह पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। भाकपा (माओवादी) संगठन की एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। वह लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थी और उसके खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में 12 मामले दर्ज हैं।

एसपी डॉ. बिमल कुमार ने दी जानकारी

मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि अनिता किस्कू पारसनाथ जोन, लुगू पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय रही है। उसके खिलाफ यूएपीए, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सीएलए एक्ट के तहत कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

2009 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी

पुलिस के अनुसार अनिता वर्ष 2009 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी। संगठन में रहते हुए वह हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटकों को छिपाने, लेवी वसूली तथा अन्य नक्सली गतिविधियों में शामिल रही।एसपी ने बताया कि संगठन के भीतर कथित शोषण, पुलिस की लगातार कार्रवाई और उसके पति अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद उसका मनोबल टूट गया। इसके बाद उसने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी 3 लाख रुपये की सहायता

एसपी ने बताया कि झारखंड सरकार की “नई दिशा–एक नई पहल” आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत अनिता किस्कू को कुल 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें से 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान कर दी गई है, जबकि शेष राशि नियमानुसार उपलब्ध कराई जाएगी।इसके अलावा सरकार उसकी रहने, खाने, सुरक्षा, पुनर्वास और न्यायालय में लंबित मामलों से संबंधित आवश्यक खर्च भी वहन करेगी।

अन्य नक्सलियों से भी की मुख्यधारा में लौटने की अपील

आत्मसमर्पण के बाद अनिता किस्कू ने नक्सलवाद को गलत रास्ता बताते हुए संगठन में सक्रिय अन्य नक्सलियों से भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उसने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सम्मानजनक जीवन जिया जा सकता है और हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।

नक्सल विरोधी अभियान को मिलेगी मजबूती

गिरिडीह पुलिस का मानना है कि अनिता किस्कू के आत्मसमर्पण से नक्सल विरोधी अभियान को नई मजबूती मिलेगी और जंगलों में सक्रिय अन्य उग्रवादियों को भी मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी।

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