नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मामले में मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। यह याचिका उनकी पत्नी गीतांजलि की ओर से दायर की गई है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा।
मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने पर केंद्र सरकार को नहीं आपत्ति
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यदि सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया जाता है, तो केंद्र सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल से डिस्चार्ज का फैसला मरीज की इच्छा से नहीं, बल्कि मेदांता के डॉक्टरों की चिकित्सीय सलाह के आधार पर होना चाहिए।
21वें दिन बिगड़ी थी तबीयत, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था और अन्य मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। अनशन के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी, जिसके बाद 21वें दिन उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दोपहर 2:30 बजे आदेश सुनाएगा हाई कोर्ट
सुनवाई के दौरान सोनम वांगचुक के चिकित्सक डॉ. लांबा भी अदालत में मौजूद रहे। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वह मामले में दोपहर 2:30 बजे अपना आदेश सुनाएगा।
अनशन खत्म करने से किया इनकार
इस बीच सोनम वांगचुक ने अस्पताल से हाथ से लिखा संदेश जारी कर कहा कि वह अपना अनशन जारी रखेंगे। उनके एक्स अकाउंट पर साझा किए गए संदेश में उन्होंने कहा कि जब तक युवा प्रतिनिधियों को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिलती या उन्हें अस्पताल में ही सांसदों से मिलने की इजाजत नहीं दी जाती, तब तक वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे।उन्होंने सरकार से शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने की भी मांग दोहराई और कहा कि युवाओं ने पूरे आंदोलन के दौरान शांति और संयम बनाए रखा है। उन्होंने सरकार और पुलिस से अपील की कि छात्रों को संसद के सामने अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।
