Jharkhand: एसीसी अडानी सीमेंट कंपनी बंदी के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना शुरू, 17 अगस्त को पश्चिमी सिंहभूम बंद की चेतावनी

चाईबासा के झींकपानी स्थित एसीसी अडानी सीमेंट कंपनी को 16 अगस्त 2026 से बंद किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार से मजदूरों, ग्रामीणों और स्थानीय दुकानदारों ने कंपनी गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन स्थायी रोजगार समाप्त कर आउटसोर्सिंग और मशीनीकरण के जरिए संचालन की तैयारी कर रहा है, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों की आजीविका प्रभावित होगी।

यूनियन ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

धरना को संबोधित करते हुए झारखंड जेनरल कामगार यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मीरन मुंडा ने कहा कि कंपनी प्रबंधन सुनियोजित तरीके से सीमेंट वेज बोर्ड व्यवस्था को समाप्त कर स्थायी कर्मचारियों की जगह ठेका श्रमिकों से काम कराने की योजना बना रहा है।उन्होंने कहा कि इससे कर्मचारियों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य श्रम अधिकार प्रभावित होंगे। अधिक मुनाफा कमाने की मंशा से मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी की कैंटीन सेवा पहले ही बंद कर दी गई है, जिससे कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

पांच सूत्री मांगपत्र सौंपा

धरना के दौरान यूनियन ने कंपनी प्रबंधन को पांच सूत्री मांगपत्र सौंपा। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

सीमेंट वेज बोर्ड के तहत मिलने वाली सभी सुविधाएं बहाल रखी जाएं।
स्थायी कर्मचारियों की जगह ठेका मजदूरों से काम कराने की नीति समाप्त की जाए।
वर्ष 2001 से 2026 तक के कथित पीएफ घोटाले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
बंद की गई कैंटीन सेवा को पुनः शुरू किया जाए।
कंपनी परिसर में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित नहीं की जाए।

17 अगस्त को पश्चिमी सिंहभूम बंद की चेतावनी

यूनियन नेताओं ने कहा कि 16 अगस्त से प्रस्तावित कंपनी बंदी के विरोध में प्रभावित गांवों में जनसंपर्क अभियान और नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनी प्रबंधन ने बंदी का निर्णय वापस नहीं लिया, तो 17 अगस्त को पूरे पश्चिमी सिंहभूम जिले में बंद का आह्वान किया जाएगा।

केंद्र सरकार को भी भेजा गया ज्ञापन

धरना से संबंधित ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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