Bihar: आजादी के 80 साल बाद गरीब परिवार के घर पहुंची बिजली, पहली बार जला बल्ब तो छलक पड़े खुशी के आंसू

औरंगाबाद। आजादी के करीब 80 वर्ष बाद औरंगाबाद जिले के अति नक्सल प्रभावित देव प्रखंड स्थित कुंडा गांव के एक गरीब परिवार के घर आखिरकार बिजली पहुंच गई। वर्षों तक अंधेरे में जीवन गुजारने वाले लोहड़ी पाल के घर जब पहली बार बल्ब जला तो यह पल परिवार और ग्रामीणों के लिए बेहद भावुक करने वाला बन गया। घर में रोशनी फैलते ही परिवार के सदस्यों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और उन्होंने भगवान का धन्यवाद करते हुए पूजा-अर्चना की।
बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वर्षों तक वंचित रहा परिवार
देव प्रखंड की हसौली पंचायत के कुंडा गांव निवासी लोहड़ी पाल का परिवार लंबे समय से बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित था। गांव में बिजली पहुंच चुकी थी, लेकिन विभिन्न कारणों से उनके घर तक कनेक्शन नहीं लग पाया था।आर्थिक तंगी, अशिक्षा और सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी के अभाव में बिजली कनेक्शन उनके लिए एक अधूरा सपना बनकर रह गया था। लोहड़ी पाल ने जीवनभर मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण किया। उम्र बढ़ने के साथ जब काम करने की क्षमता कम हुई तो उन्होंने बकरी पालन को अपनी जीविका का सहारा बना लिया।
पड़ोसी की मदद से पूरी हुई वर्षों पुरानी इच्छा
बताया जाता है कि कुछ सप्ताह पहले लोहड़ी पाल ने अपने पड़ोसी राजेश मिश्रा से अपनी समस्या साझा की। उन्होंने बताया कि उन्हें बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया तक की जानकारी नहीं थी।इसके बाद राजेश मिश्रा ने उनकी मदद का जिम्मा उठाया। वे लोहड़ी पाल को लेकर बिजली विभाग पहुंचे और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराते हुए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कराया।
25 दिनों के इंतजार के बाद घर में फैली रोशनी
आवेदन जमा होने के बाद परिवार करीब 25 दिनों तक बिजली कनेक्शन का इंतजार करता रहा। आखिरकार बिजली विभाग की टीम गांव पहुंची और घर में मीटर लगाकर बिजली कनेक्शन चालू कर दिया।जैसे ही स्विच दबाया गया और घर में पहली बार बल्ब जला, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वर्षों का इंतजार एक पल में पूरा हो गया।
परिवार ने मनाया त्योहार जैसा जश्न
घर में बिजली आने की खुशी में परिवार ने पूजा-पाठ किया और भगवान का आभार व्यक्त किया। परिजनों ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार दिन है। गांव के लोगों ने भी इस पल को खास बताया और परिवार को बधाई दी।ग्रामीणों का कहना है कि आज के आधुनिक दौर में भी किसी घर का पहली बार बिजली से रोशन होना कई सवाल खड़े करता है, लेकिन यह घटना यह भी साबित करती है कि जागरूकता और सहयोग से बदलाव संभव है।
संघर्ष, उम्मीद और बदलाव की प्रेरणादायक कहानी
लोहड़ी पाल के घर पहुंची यह रोशनी सिर्फ बिजली कनेक्शन मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, धैर्य और उम्मीद की मिसाल है। दशकों तक इंतजार करने वाले इस परिवार के लिए यह रोशनी नए सपनों, नई संभावनाओं और बेहतर भविष्य की शुरुआत बन गई है।यह घटना यह संदेश भी देती है कि यदि समाज का एक व्यक्ति आगे बढ़कर किसी जरूरतमंद की मदद करे, तो उसके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।



